चंडीगढ़: प्रधानमंत्री मोदी के बाद अब गृहमंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान पर बरसे हैं। राजनाथ ने चंडीगढ़ में की गई रीजनल एडीटर्स कॉन्फ्रेंस में दो टूक कहा कि पाकिस्तान ने आतंक को खूब पाला-पोसा है, उसे अब आतंक की फैक्ट्री बंद करनी होगी। राजनाथ ने कहा कि पाक ने आतंकवाद को ही अपनी नीति समझ लिया है, जिसके चलते वह न सिर्फ दक्षिण एशिया, बल्कि पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। भारत दक्षिण एशिया में अमन-चैन और विकास चाहता है, भारत पाक की मदद करने को भी तैयार है, बशर्ते उसे आतंक के कारखाने बंद करने होंगे। राजनाथ सिंह का यह बयान पीएम मोदी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को 'आतंक की जननी' करार दिया था और आतंकवादियों को उसका बच्चा बताया था। पाकिस्तान फिलहाल बाहरी ही नहीं, घरेलू संकट से भी गुजर रहा है। उड़ी आतंकी हमलों और पीओके में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक की दुनिया भर में थू-थू हुई। इसके बाद नवाज सरकार और मुल्क की सेना में अनबन की खबरें हैं। नवाज ने पाक सेना प्रमुख से कहा कि आतंकियों के खिलाफ कोई फैसला लेने का वक्त आ गया है, नहीं तो अल-थलग पड़ता मुल्क कहीं का नहीं रहेगा। नवाज ने यह बात रावलपिंडी में सेना प्रमुख के साथ बेहद खुफिया तौर पर बुलाई गई बैठक में कही थी। बाद में पाकिस्तान के ही अखबार 'डॉन' पर इस खबर को लीक करने का आरोप भी लगा। मसलन, राहील शरीफ ने नवाज को खबर लीक होने पर कारण पूछा और पता लगाने के लिए पांच दिन का वक्त तक दे दिया।
वहीं, पाक मीडिया भी आपस में बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ मीडिया हाउस नवाज का पक्ष ले रहे हैं तो कुछ राहील के समर्थन में खड़े हैं। पाकिस्तान के अंदरूनी हालात को देखते हुए सेना द्वारा तख्तापलट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है, क्यों कि, पाक में ऐसा कई दफा हो चुका है और राहील के तेवर भी कुछ ऐसे ही लग रहे हैं, जबकि नवंबर में उन्हें रिटायर होना है। पाक के लिए राहत की बात यह जरूर है कि अपने दोगलेपन की वजह से चीन ने उसका साथ नहीं छोड़ा है। चीन ने पाक को सदाबहार दोस्त तक बताया है। इसके पीछे उसके अपने हित हैं। पाक को आर्थिक और मानसिक मदद देकर वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा बना रहा है, जिससे वह प्राकृतिक संपदा का दोहन कर उससे कहीं ज्यादा पा भी रहा है। लेकिन आज नहीं तो कल पाक को भारत की बात समझ आना लाजमी है, क्योंकि भारत ही नहीं, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और वर्मा जैसे देशों ने सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर उसे कड़ी चेतावनी दे दी है।