चंडीगढ़: अक्सर यह कहा जाता है कि लड़कियों का शारीरिक शोषण ज्यादार घरों में ही होता है। चंडीगढ़ में 10 वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के पीछे भी बच्ची का मामा ही कसूरवार निकाला। यह खुलासा बच्ची द्वारा जन्म दिए बच्चे के डीएनए की जांच से हुआ है। पुलिस ने बताया कि दस वर्षीय बलात्कार पीड़ित के दो माह के बच्चे का पिता, पीड़ित का छोटा मामा ही निकला।
पहले संदेह किया जा रहा था कि पीड़ित के बच्चे का पिता उसका बड़ा मामा है। पीड़ित ने इस साल अगस्त में एक बच्चे को जन्म दिया है। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पता चला कि पीड़ित का छोटा मामा ही उसके बच्चे का पिता है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्ची के बड़े मामा ने भी उससे कथित तौर पर बलात्कार किया था और उसे गिरफ्तार किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि बच्ची ने बड़े मामा के डीएनए का नमूना नवजात के डीएनए से न मिलने पर उसके छोटे भाई पर संदेह गया। उस पर भी पीड़ित से बलात्कार करने का आरोप है।
चंडीगढ़ के एसएसपी जगदाले नीलांबरी विजय ने बताया कि पीड़ित के छोटे मामा के डीएनए का नमूना नवजात के डीएनए के नमूने से मिल गया। उन्होंने बताया कि बच्ची के दोनों मामा ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। इससे पहले बच्ची के चाचा की भी डीएनए जांच कराई गई थी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र जज पूनम आर जोशी की अदालत में एक पूरक आरोपपत्र आज दाखिल किया गया। बलात्कार पीड़ित का गर्भपात का अनुरोध उच्चतम न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया था। उसने अगस्त में यहां के एक सरकारी अस्पताल में सीजेरियन से एक बच्चे को जन्म दिया।
बच्ची के परिवार वालों और डॉक्टरों ने उससे कहा था कि उसके पेट में पथरी है और उसे निकालना होगा। पूर्व में पुलिस ने बताया कि लड़की के साथ उसके बड़े मामा ने कई माह तक कथित तौर पर बलात्कार किया। इस अपराध का पता तब चला जब बच्ची ने जुलाई में पेट में दर्द होने की शिकायत की और उसे अस्पताल ले जाया गया।
जांच में पता चला कि उसके पेट में 30 सप्ताह का गर्भ है। उच्चतम न्यायालय ने 28 जुलाई को बलात्कार पीड़ित का, 32 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराने का अनुरोध खारिज कर दिया। यह व्यवस्था न्यायालय ने उस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दी जिसमें कहा गया था कि गर्भपात पीड़ित और भ्रूण दोनों के हित में नहीं है।