नई दिल्ली: चंडीगढ़ शहर से गुजरने वाले हाईवे को डिनोटिफाई करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ एराइव सेफ इंडिया की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से दूसरे राज्यों में भी असर पड़ेगा जहां हाईवे शहर से होकर सिटी रोड की तरह गुजरते हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर स्टेट हाईवे सिटी को डिनोटिफाई किया गया है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। क्योंकि शहर में तेज रफ्तार से गाड़ियां नहीं चलतीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारा आदेश बिल्कुल साफ है कि नेशनल और स्टेट हाई वे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें नहीं होंगी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि अगर कोई स्टेट हाईवे सिटी के बीच से होकर गुजरता है और अगर उसे डिनोटिफाई किया जाता है तो पहली नजर में गलत नहीं होगा. क्योंकि शहर के बीच से गाड़िया आम तौर पर धीमी रफ्तार से चलती हैं। सिटी के अंदर के हाईवे और सिटी के बाहर के हाईवे में बहुत अंतर है। हाईवे का मतलब है जहां तेज रफ्तार में गाड़ियां चलती हों।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारे आदेश का उद्देश्य सिर्फ यह था कि हाईवे के पास शराब उपलब्ध न हो क्योंकि लोग शराब पीकर तेजी से गाड़ी चलाते हैं और दुर्घटना हो जाती है। दरअसल चंडीगढ़ में कई जगह हाईवे का नाम बदलकर 'मेजर डिस्ट्रिक रोड' का नाम कर दिया गया है। इसी को लेकर एराइव सेफ इंडिया नामक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला जनहित में लिया था क्योंकि इससे सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन का सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए 16 मार्च 2017 का नोटिफिकेशन अवैध है और रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है।