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शिमला: हिमाचल प्रदेश के रामपुर (जिला शिमला) में यात्रियों से भरी एक बस के खाई में गिरने से 28 लोगों की मौत हो गई है और नौ लोग जख्‍मी हो गए हैं। मीडिया की खबरों के मुताबिक बस सोलन से किन्नौर जा रही थी। घटना की सूचना मिलने पर एसडीएम मौके पर पहुंच गए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है। हादसे की जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचे रामपुर के पुलिस उपाधीक्षक देव कुमार नेगी ने बताया कि रेकांग पियो से सोलन जा रही एक बस के गहरी खाई में गिर जाने से 28 लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए और लगभग सात लोगों को पता नहीं चल सका है। उन्होंने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है। घायलों को खनारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि इस मार्ग पर चलने वाली ज्यादातर बसों में आम तौर पर 35 से 40 यात्री सवार रहते हैं जिनमें से ज्यादातर किन्नौर के स्थानीय लोग, कर्मचारी और छात्र शामिल हैं। चालक के वाहन पर से नियंत्रण खो देने के कारण बस रामपुर के पास सतलुज नदी के किनारे स्थित पहाड़ी से लगभग 250 मीटर गहरी खाई में गिर गयी। दुर्घटनास्थल रामपुर शहर से महज पांच किलोमीटर दूर है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। वहीं दूसरी तरफ जम्मू कश्मीर के डोडा में बादल फटने से दो लोगों की मौत हो गई है।

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व अन्य की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किए गए धनशोधन मामले को समाप्त करने की मांग की गई थी। ईडी ने यह मामला धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इनके खिलाफ दर्ज किया है। न्यायमूर्ति आर. के. गुबा ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह व दो अन्य की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संभावित गिरफ्तारी और जब्ती के खिलाफ याचिका को अनुमति नहीं दी जा सकती। ईडी ने सितंबर 2015 में 83 वर्षीय वीरभद्र सिह व दूसरों पर पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था. ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक आपराधिक शिकायत के संज्ञान में आने पर इस मामले को दर्ज किया। सीबीआई ने 31 मार्च को आरोपपत्र दाखिल किया था, जब हाई कोर्ट ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी पर बेहिसाब संपत्ति मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था।

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सोमवार सुबह एक निजी वाहन के सड़क से फिलकर एक गहरी खाई में गिर जाने से एक ही परिवार के छह सदस्यों सहित सात तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि 12 तीर्थयात्रियों को ले जा रहा एक वाहन सड़क से फिसलने के बाद 200 मीटर से ज्यादा गहरी खाई में गिर गया। जिंदा बचे पांच लोगों को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें यहां इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ये तीर्थयात्री चुरधार में स्थित एक मंदिर के दर्शन करके अपने घर वापस आ रहे थे। जब वे सिरमौर जिले में अपने गांव की ओर थे, तभी यहां से लगभग 190 किलोमीटर दूर गुम्मा गांव के पास यह दुर्घटना घटी। राज्य में यह सबसे खतरनाक इलाका है। पुलिस ने कहा कि वाहन के फिसलने का कारण पता नहीं चला है। ज्यादातर मृतक आपस में रिश्तेदार थे। अप्रैल में इसी इलाके में एक बस के नदी में गिरने की एक घटना में 45 लोग मारे गए थे। इस बस के टोंस नदी में गिरने की घटना के दौरान उत्तराखंड से संबंध रखने वाला बस के कंडक्टर समेत दो लोग बस से कूदकर बचने में कामयाब रहे थे।

शिमला: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बीते तीन दशक में पहली बार शिमला नगर निगम में सर्वाधिक सीटें जीतकर इतिहास रच दिया, लेकिन वह 18 सदस्यों के सामान्य बहुमत के आंकड़े को हासिल करने में नाकाम रही। पार्टी ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, निगम पर 26 वर्षों तक काबिज रहने वाली कांग्रेस के 12 उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। साथ ही चार निर्दलीय तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का एक उम्मीदवार भी चुनाव जीतने में कामयाब रहा। तीन निर्दलीय पार्षदों शारदा चौहान, कुसुम लता तथा संजय परमार ने कांग्रेस को अपना समर्थन देने का ऐलान किया। जिसका अर्थ है कि कांग्रेस के पास 15 पार्षदों का समर्थन है, लेकिन भाजपा के 17 पार्षदों की तुलना में आंकड़े अभी भी उसके पक्ष में नहीं हैं। भाजपा के एक नेता ने कहा, “हम एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से नगर निगम पर काबिज होने जा रहे हैं।” चौथे निर्दलीय पार्षद भाजपा के बागी हैं और उनके पार्टी का समर्थन करने की संभावना है, जिससे बहुमत का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। मतदान शुक्रवार को हुआ था, जिसमें 91,000 से भी अधिक योग्य मतदाताओं में से करीब 58 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव में निर्वासित तिब्बतियों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

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