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नई दिल्ली: असम के मनोनीत मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रविवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से युवा मामलों और खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सर्बानंद सोनोवाल का इस्तीफा तत्काल प्रभार से स्वीकर कर लिया है।’ विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को उनके वर्तमान विभाग के अलावा युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाए।’ सोनोवाल को आज दोपहर गुवाहाटी में नवनिर्वाचित विधायकों की एक बैठक में भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और उन्हें राज्यपाल पी बी आचार्य ने सरकार बनाने का न्यौता दिया। आज अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनोवाल की असम में चुनाव के बावजूद एनआईएस पटियाला जाकर वहां रियो ओलंपिक्स की तैयारी कर रहे खिलाड़ियों के प्रशिक्षण से जुड़ी चीजों का निरीक्षण करने के वास्ते वक्त निकालने को लेकर प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘चुनाव हो रहे थे, वह मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे लेकिन उन्होंने बतौर खेल मंत्री अपना कर्तव्य निभाया। यह बड़ी बात है।’

गुवाहाटी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में असम में भाजपा के नेतृत्व वाली नयी सरकार 24 मई को शपथ लेगी। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी सर्वानंद सोनोवाल ने यह जानकारी दी है। सोनोवाल ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गुवाहाटी के खानपारा मैदान में आयोजित किया जाएगा। 126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा ने 60 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (अगप) और बोडो पीपुल्स फ्रंट ने क्रमश: 14 और 12 सीटों पर जीत हासिल की है। असम के चुनावी नतीजों में भाजपा ने 60 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि उसकी सहयोगी असम गण परिषद ने 14 सीटें जीती हैं, साथ ही बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 12 सीटों पर जीत मिली। तरूण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस ने 26 सीटें से ही संतोष करना पड़ा जबकि एआईयूडीएफ 13 सीट जीत पाई। निर्दलीय ने एक सीट जीती है। अगप ने पिछले चुनाव में केवल नौ सीटें जीती थीं और इस बार बेहतर प्रदर्शन कर 14 सीटें अपने नाम कीं।

गुवाहाटी: असम में भाजपा नीत गठबंधन अपने मिशन 84 के लक्ष्य को पार करते हुए जबर्दस्त जीत के साथ इतिहास रचते हुए 15 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस को हटाकर पहली बार पूर्वोत्तर के किसी राज्य में सरकार बनाने जा रही है। चुनावी नतीजों में भाजपा ने 60 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि उसकी सहयोगी असम गण परिषद ने 14 सीटें जीती हैं और साथ ही बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट 12 पर जीत दर्ज की है। तरूण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस ने 26 सीटों से ही संतोष करना पड़ा जबकि एआईयूडीएफ 13 सीट जीत पाई। निर्दलीय ने एक सीट जीती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम में भाजपा की जीत को ‘ऐतिहासिक’ और ‘अभूतपूर्व’ करार देते हुए कहा कि पार्टी राज्य के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और राज्य को विकास की नई उंचाइयों तक ले जाएगी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट में कहा, 'असम में अभूतपूर्व जीत के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता को हृदय से बधाई। यह जीत सभी मानकों पर ऐतिहासिक है।' असम में भाजपा की जीत के सूत्रधारों में शामिल पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि राज्य में नई सरकार की मुख्य प्राथमिकता वृहद असमिया समुदाय के हितों को सुरक्षा प्रदान करना होगा। सोनोवाल ने कहा कि घुसपैठ को रोकना हमारे लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी।

गुवाहाटी: असम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ का किंगमेकर बनने का सपना साकार नहीं हो सका और उनकी पार्टी के खाते में 13 सीटें जाती दिख रही हैं। चुनाव में अजमल को खुद हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में जहां भाजपा नीत गठबंधन 87 सीटें जीतकर राज्य में सत्ता पर कब्जा जमाने के करीब पहुंच गई है वहीं 2011 में 18 सीट जीतने वाली अजमल की एआईयूडीएफ को इस बार 13 सीटें ही मिलती दिख रही हैं। पिछले विधानसभा में अजमल की पार्टी मुख्य विपक्षी दल थी। दक्षिण सल्मारा: एआईयूडीएफ प्रमुख और धुवरी से सांसद बदरुद्दीन अजमल की 16,723 मतों से हार हुई। उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी वाजिद अली चौधरी ने पराजित किया। चुनाव में मतदान के दौरान बदरुद्दीन अजमल ने भविष्यवाणी की थी कि इस चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिलेगा और वे किंगमेकर की भूमिका में होंगे। उन्होंने संकेत दिया था कि वे कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। हालांकि बदरुद्दीन की पेशकश को कांग्रेस ने तब यह कहकर खारिज कर दिया था कि उसे किसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव के दिन अजमल ने भाजपा से दूरी बनाने की बात संभवत: इसलिए की थी क्योंकि मतदाताओं के बीच यह संदेश न फैल जाए कि चुनाव के बाद एआईयूडीएफ, भाजपा का दामन थाम सकती है।

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