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इंफाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मणिपुर में आठ प्रमुख विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने के साथ ही चार अन्य की आधारशिला रखी। इंफाल में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने इन परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें मोरेह में एकीकृत जांच चौकी, दोलाईथाबी बैराज, खाद्य भंडारण गोदाम और बफर जलाशय शामिल हैं। मणिपुर में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'पिछली सरकार के दौरान 100 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को 200-250 करोड़ की लागत पर पूरा किया गया। राष्ट्रीय धन के इस दुरुपयोग ने मेरे सब्र का बांध तोड़ दिया।'

पीएम मोदी ने कहा, 'आज मणिपुर को 125 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली एकीकृत जांच चौकी का तोहफा मिला है। यह मात्र एक जांच चौकी ही नहीं है..इसमें दर्जन भर विशेषताएं हैं।' मणिपुर में रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'पूर्ववर्ती सरकार के ढीले-ढाले रवैये के कारण 12 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं 'ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थीं, हमने उन्हें कार्यान्वित किया।'

नई दिल्ली: भाजपा नीत केंद्र और राज्य सरकार की, सोशल मीडिया पर आलोचना करने वाले एक पत्रकार को स्थानीय अदालत ने एक साल हिरासत में रखने की सजा सुनाई है। राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। इंफाल वेस्ट जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 14 दिसंबर को यह आदेश पारित किया। मीडिया को इस बयान की प्रति बुधवार को मिली। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के परामर्श बोर्ड ने 11 दिसंबर को अपनी बैठक में पत्रकार किशोरचंद वांगखेम के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की।

बयान में बताया गया कि 13 दिसंबर को बोर्ड ने सिफारिश की कि वांगखेम को एनएसए के प्रावधानों के तहत हिरासत में लेने के पर्याप्त आधार हैं। मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने एनएसए के तहत 12 महीने तक पत्रकार को हिरासत में रखने की परामर्श बोर्ड की अनुशंसाओं को स्वीकृति दे दी। इंफाल के 39 साल के पत्रकार को एनएसए के तहत 26 नवंबर को हिरासत में लिया गया। रानी झांसी की जयंती मनाने के लिए केंद्र और मणिपुर की भाजपा नीत सरकार की आलोचना करते हुए कई वीडियो कथित तौर पर अपलोड करने के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया।

नई दिल्ली: मणिपुर में कथित फर्जी मुठभेड़ को लेकर सीबीआई ने सीआरपीएफ, इंफाल पुलिस और असम रायफल्स के खिलाफ पांच एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से इस हत्या की जांच करने के आदेश दिए थे। गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने मणिपुर में अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं के 1,528 मामलों की जांच के लिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान पिछले साल 14 जुलाई को एक एसआईटी गठित की थी। शीर्ष अदालत ने एफआईआर दर्ज कराने और कथित अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं के मामलों की जांच का आदेश दिया था।

मणिपुर में वर्ष 2000 से 2012 के बीच सुरक्षाबलों और पुलिस पर कथित रूप से 1528 फर्जी एनकाउंटर और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं का आरोप है। इससे पहले, अटॉर्नी जनरल ने सर्वोच्च अदालत की उस टिप्पणी पर भी ऐतराज जाहिर किया था जिसमें जस्टिस लोकुर और जस्टिस ललित की बेंच ने कहा था कि जिन लोगों ने कत्ल किया है, वे खुलेआम घूम रहे हैं। मणिपुर पुलिस की तरफ से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि इस मामले को जस्टिस लोकुर और जस्टिस ललित की बेंच को नहीं सुनना चाहिए।


इस बात पर जस्टिस ललित ने कहा कि जो टिप्पणी की गई थी, वे किसी पुलिसवाले के खिलाफ नहीं थी। अगर आप चाहते हैं, तो हम आदेश जारी कर सकते हैं। उसके बाद इस मामले में केंद्र ने कहा था कि सेना के जवान जीवन और मौत से लड़ रहे हैं। अगर कोर्ट की ये टिप्पणी है, तो उनका मोरल गिरता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि आप ये कहना चाहते हैं कि हम केस को मॉनिटर न करें। इसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस मामले की सुनवाई किसी दूसरी बेंच में हो और सीबीआई स्वतंत्र हो कर जांच करे।

14 जुलाई को हुआ था एसआईटी का गठन

मणिपुर में कथित तौर पर न्यायेत्तर हत्याओं के 1,528 मामलों की जांच के लिए एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पिछले साल 14 जुलाई को एक एसआईटी का गठन किया था और इन मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच करने का आदेश दिया था।

नई दिल्ली: सरकार ने मणिपुर के आठ उग्रवादी समूहों के गैरकानूनी और हिंसक गतिविधियों में शामिल बने रहने के लिए उन पर लगे प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय ने कहा कि इन समूहों ने भारत से अलग होकर एक अलग मणिपुर राज्य बनाने के अपने मकसद को खुलकर व्यक्त किया है, उन्होंने अपने मकसद को हासिल करने के लिए सशस्त्र तरीके अपनाये हैं और सुरक्षा बलों, पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों पर हमले किये हैं।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत जिन संगठनों को प्रतबंधित किया गया है, उनमें पीपल्स लिबरेशन आर्मी या पीएलए और उसकी राजनीतिक इकाई, रिवाल्यूशनरी पीपल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र इकाई मणिपुर पीपल्स आर्मी (एमपीए), पीपल्स रिवॉल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलीपाक और उसकी सशस्त्र इकाई ‘रेड आर्मी’, कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) और इसकी सशस्त्र इकाई ‘रेड आर्मी’, कांगली याओल कांबा लुप (केवाईकेएल), कॉर्डिनेशन कमेटी और अलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलीपाक हैं।

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