ताज़ा खबरें
टैरिफ से सहमा बाजार:सेंसेक्स 931 अंक गिरा, निफ्टी 23000 से फिसला
बजट में दलित-आदिवासी के लिए उचित हिस्सा कानूनन जरूरी हो: राहुल
वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दाखिल
वक्फ विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी कांग्रेस
'वक्फ बिल को थोपा गया, अदालत कर देगी खारिज': अभिषेक सिंघवी
वक्फ विधेयक राज्यसभा से भी पारित,पक्ष में पड़े 128 वोट, विपक्ष में 95

देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हिंदू संगठनों द्वारा होने वाले महापंचायत के मामले को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार पर सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी हाल में क़ानून व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी हिस्सों में कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए। अदालत ने मुसलमानों की दुकानों में तोड़फोड़ करने के संदर्भ में कहा कि किसी की भी व्यक्ति की जान या माल का नुकसान न हो।

उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने कहा, "हम सोशल मीडिया पर आरोपों और प्रत्यारोपों के साथ भड़कना नहीं चाहेंगे। या टेलीविजन और सोशल मीडिया पर बहस नहीं करेंगे।"

कोर्ट को उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि उत्तरकाशी में महापंचायत की इजाज़त नहीं दी गई है। साथ ही इलाके में धारा 144 भी लगाई गई है।

उत्तराखण्ड सरकार के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कहा कि उत्तरकाशी के पुरोला में महापंचायत पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई है। हाईकोर्ट ने आज पूरे मामले में सरकार को नोटिस जारी कर 3 हफ्तों में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ला एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, किसी भी तरह का प्रॉपर्टी का नुकसान नहीं हो। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि धरना प्रदर्शन रैली सभाओं के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी। कोर्ट ने मामले को गम्भीर मानते हुए टीवी डिवेट और सोशल मीडिया में इस मामले पर प्रतिबंध लगाया है, ताकि माहौल खराब ना होने पाए। चीफ जस्टिस कोर्ट ने डीएम उत्तरकाशी को मामले में एक्शन लेने के साथ सख्ती बरतने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि कानून के तहत कार्रवाई हो उन लोगों के खिलाफ सख्ती बरतें जो माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।

दरअसल हिंदू संगठनों ने "लव जिहाद" के खिलाफ "महापंचायत" आयोजित करने की बात कही थी। गत 26 मई को पुरोला में एक नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण करने की कोशिश करने के आरोप में अल्पसंख्यक समुदाय के एक व्यक्ति सहित दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किए जाने के बाद से इस क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव है। लड़की को छुड़ाने के साथ ही आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

स्थानीय व्यापार निकायों और दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों ने पुरोला और पड़ोसी नगरों जैसे बरकोट, चिन्यालीसौड़ तथा भटवारी में "लव जिहाद" के मामलों के खिलाफ एक अभियान चला रखा है।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख