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कोहिमा: नगालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के अध्यक्ष एस लीजित्सु को 22 फरवरी को राज्य के नये मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई जाएगी।उन्हें राज्यपाल पी बी आचार्य ने अगली सरकार बनाने के लिए आज (सोमवार) आमंत्रित किया था। उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए आम सहमति से चुन लिया गया और उन्होंने औपचारिक रूप से अपना दावा पेश किया था। लीजित्सु ने निवर्तमान मुख्यमंत्री टी आर जेलियांग के साथ राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की जहां उन्होंने अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। इससे पहले आज दिन में लीजित्सु को डेमोक्रेटिक अलायंस ऑफ नगालैंड :डीएएन: की बैठक में जेलियांग की जगह मुख्यमंत्री पद के लिए चुन लिया गया। जेलियांग ने कल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। राज्यपाल पी बी आचार्य ने उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया था, लेकिन आगे की व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने को कहा था।राज्य सरकार के शहरी नगर निकाय चुनाव (यूएलबी) में 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने की घोषणा के बाद नगालैंड में प्रदर्शन शुरू हो गया था। 81 वर्षीय लीजित्सु ने नगा जनता को आगे किसी संकट से बचाने के लिए अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए जेलियांग की सराहना की।उन्होंने आम सहमति से अपने चुनाव के बाद डीएएन के विधायकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘उन्होंने (जेलियांग) बड़े दिल से यह किया है और मैं इसे कुर्बानी की संज्ञा देना चाहता हूं।’ लीजित्सु ने विधायकों से मतभेद भुलाने को और नगा समाज के हित में मिलकर आगे बढ़ने को कहा।

कोहिमा: हिंसा प्रभावित नगालैंड में नाटकीय घटनाक्रम में टी आर जेलियांग ने आज (रविवार ) राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया । मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान ने पुष्टि की कि जेलियांग पद छोड़ रहे हैं और कल सुबह होने वाली नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक दल की बैठक में आम राय से नया नेता चुना जाएगा । एनपीएफ की बैठक से पहले यहां सुबह 11 बजे नगालैंड जनतांत्रिक गठबंधन (डीएएन) की बैठक होगी। एनपीएफ के एक सूत्र ने दावा किया कि राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य से एकमात्र सांसद नीफियू रियो को आठ निर्दलीय सहित 49 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जबकि कम से कम तीन विधायक पार्टी अध्यक्ष डॉ. शुर्होजेली लीजीत्सु के साथ हैं । इन तीन विधायकों में विधानसभा अध्यक्ष चोटीसूह साजो भी शामिल हैं । बहरहाल, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लगातार बदल रही राजनीतिक स्थितियों के कारण मामला जटिल होता जा रहा है और प्रत्येक पक्ष का संख्याबल तभी स्पष्ट हो सकेगा जब कल ही बैठकें हो जाएं । असम के काजीरंगा के एक रिसॉर्ट में रखे गए विधायकों ने शुक्रवार की रात को ही कोहिमा से रवाना होना शुरू कर दिया था, क्योंकि लीजीत्सु नई दिल्ली से राज्यपाल पी बी आचार्य के आने के तुरंत बाद जेलियांग को हटाने के लिए सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी में थे । एनपीएफ सूत्रों ने बताया कि रियो और जेलियांग दोनों ने कल नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।

कोहिमा: नगालैंड में शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं के आरक्षण की मांग को लेकर कोहिमा में जारी प्रदर्शन गुरुवार को हिंसा में तब्‍दील हो गया। हजारो लोगों ने सचिवालय की तरफ मार्च किया जहां मुख्‍यमंत्री टीआर जेलिआंग समेत सभी मंत्री हैं। नगर पालिका परिषद और जिला कमिश्‍नर के दफ्तरों को आग लगा दी गई। अन्‍य सरकारी दफ्तरों में भी तोड़फोड़ की गई और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। सचिवलय की नई इमारत के पास केंद्रीय बलों की तैनाती कर दी गई है। मंगलवार को नगालैंड के दिमापुर और लोंगलेंग जिलों में पुलिस और भीड़ के बीच हुई झड़पों में दो लोगों की मौत हो गयी थी और कई लोग घायल हो गए थे, जबकि लोगों ने सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया था। उसी दिन कुछ जिलों में शहरी निकाय चुनाव हुए थे, हालांकि निर्वाचन आयोग ने सात शहरी निकायों में होने वाले चुनाव को दो महीने के लिए स्थगित करने के संबंध में सोमवार को ही अधिसूचना जारी की थी। मंगलवार आधी रात से ही प्रदेश में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गयी थी। कुछ आदिवासी संगठनों ने चुनाव का विरोध करते हुए जिलों में बंद का आह्वान किया था। उधर नगालैंड ट्राइब्स एक्शन समिति (एनटीएसी) ने शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनाव में संघर्ष में दो युवकों की मौत के बाद मुख्यमंत्री टीआर जेलिआंग और उनकी कैबिनेट का गुरुवार शाम चार बजे तक इस्तीफा मांगा था।

नई दिल्ली: केंद्र ने पूरे नगालैंड राज्य के लिए ‘अशांत इलाके’ की अपनी अधिसूचना छह महीने के लिए बढ़ा दी है जिससे सशस्त्र बलों को राज्य में अफ्स्पा के तहत बिना वारंट के तलाशी, छापेमारी और गिरफ्तारी की मंजूरी जारी रहेगी। गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा कि उसका मानना है कि पूरे नगालैंड में ‘‘अशांत एवं खतरनाक स्थिति है’’ जिसे देखते हुए असैन्य प्रशासन की मदद के लिए सशस्त्र बलों का इस्तेमाल जरूरी है। कल जारी की गयी अधिसूचना में कहा गया, ‘‘इसलिए अब सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम, 1958 की धारा तीन द्वारा दिए गए अधिकारों के अधीन केंद्र सरकार 30 जून, 2016 से प्रभाव के साथ पूरे राज्य को छह महीने के लिए ‘अशांत इलाका’ घोषित करती है।’’ घोषणा से तीन दिन पहले नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन-आईएम) के प्रमुख इसहाक चिशी सू का यहां के एक अस्पताल में निधन हो गया था। उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। हालांकि अधिसूचना में पूरे नगालैंड को ‘अशांत इलाका’ घोषित करने के कारण नहीं बताए गए, अधिकारियों ने कहा कि यह अधिसूचना सालों पहले जारी किए गए एक आदेश को जारी रखते हुए आयी है और पूर्वोत्तर राज्य की स्थिति के आकलन पर आधारित है जो अब भी ‘गंभीर’ है।

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