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कोहिमा: नगालैंड में 5 दिसंबर के हमले की जांच के लिए पहुंची सेना की टीम ने राज्‍य की जांच टीम को उन सैनिकों का बयान रिकॉर्ड करने की अनुमति दी है जो ऑपरेशन में शामिल है। इस ऑपरेशन में 14 आम नागरिकों को जान गंवानी पड़ी थी। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। बाद में ग्रामीणों ने गुस्‍से में जवानों को घेर लिया थ और उनके हमले में एक सैनिक को जांन गंवानी पड़ी थी। गलत पहचान के कारण यह घटना हुई थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, नगालैंड स्‍पेशल इनवेस्‍टीगेशन टीम यानी एसआईटी इस सप्‍ताह 21 पैरा स्‍पेशल फोर्स के सैनिकों के बयान रिकॉर्ड करने का काम पूरा कर सकती है। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं कि है कि राज्‍य स्‍तर की टीम की ओर से की जा रही जांच किस तरह आगे बढ़ेगी क्‍योंकि नगालैंड में इस समय आर्म्‍ड फोर्सेस (स्‍पेशल) पावर्स एक्‍ट (अफस्पा) लागू है, जो केंद्र की अनुमति के बिना सुरक्षा बलों पर किसी भी तरह का अभियोग चलाने से संरक्षण प्रदान करता है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच को गति प्रदान करने के लिए नगालैंड एसआईटी का विस्‍तार करते हुए 8 सदस्‍यों से 22 सदस्‍यों का किया गया है।

कोहिमा: नगालैंड में विवादास्पद सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम यानी अफ्स्पा को हटाने पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने 23 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक को लेकर रविवार को एक ट्वीट में यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री रियो ने बताया कि केंद्र नगालैंड से अफ्स्पा हटाने पर गौर करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करेगा। गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (पूर्वोत्तर) समिति की अध्यक्षता करेंगे। समिति में नगालैंड के मुख्य सचिव, डीजीपी भी होंगे। समिति 45 दिनों के भीतर सिफारिशें सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

सशस्त्र बलों को विशेषाधिकार देने वाले इस कानून को हटाने की मांग ने इस महीने की शुरुआत में मोन जिले में सेना की कार्रवाई में 14 नागरिकों की मौत होने के बाद जोर पकड़ा है। इसके खिलाफ राजधानी कोहिमा समेत पूरे राज्य में विरोध-प्रदर्शन हुए थे।

कोहिमा: नगालैंड में अफस्पा को हटाने की मांग तेज होती जा रही है। सोमवार को नगालैंड विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तहत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्‍पा ) को हटाने की मांग केंद्र सरकार से की गई है। विधानसभा में 5 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया है और इसके लिए विशेष तौर पर विधानसभा सत्र बुलाया गया था।

विधानसभा में नगा शांति वार्ता के तहत समाधान प्रक्रिया भी जल्द पूरा करने की मांग की गई है। वहीं नगालैंड में सेना के ऑपरेशन में हुई चूक को लेकर उचित प्राधिकार की ओर से माफी की मांग भी की गई है।

नगालैंड सरकार ने नागरिक कानूनों के तहत इस मामले में पूरा न्याय करने का भरोसा भी दिलाया है। ताकि इस हत्याकांड के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जा सके। नगालैंड विधानसभा ने मोन जिले के नागरिकों, सिविल सोसायटी और अन्य संगठनों से संयम बरतने की भी अपील की है। नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने कहा कि लंबी चर्चा के बाद हमने ये प्रस्ताव पारित किया है।

कोहिमा: सेना के उग्रवाद विरोधी अभियान के दौरान नगालैंड के मोन जिले में 14 नागरिकों की मौत को लेकर पूरे राज्‍य में चल रहा विरोध, अब राजधानी कोहिमा तक पहुंच गया हैं। नगा स्‍टूडेंट फेडरेशन (एनएसएफ) ने आज शहर में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। जिसमें हजारों की संख्‍या में लोग, मारे गए आम नागरिकों को न्‍याय दिलाने और विवादास्‍पद आर्म्‍ड फोर्स स्‍पेशन पावर्स एक्‍ट (अफस्पा) को रद्द करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे।

गौरतलब है कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी की कुछ घटनाओं में चार और पांच दिसंबर को मोन जिले में कुल 14 आम नागरिक मारे गए थे। गोलीबारी की पहली घटना का कारण ‘‘गलत पहचान'' को बताया गया था। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और तख्तियां ले रखीं थी जिस पर, 'अफस्पा को रद्द करने से पहले कितनी बार गोली चलाई जानी चाहिए' और 'अफस्पा को बैन करो, जैसे नारे लिखे हुए थे। शुक्रवार की रैली, प्रदर्शन का लगातार तीसरा दिन होने के कारण ही अहम नहीं थी बल्कि यह इस बात का भी संकेत था कि मामले को लेकर नगा लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है।

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