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कोहिमा: नगालैंड के मुख्यमंत्री टी आर जेलियांग ने नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के दस विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर राज्य विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष एक समग्र याचिका दायर की है। कल दायर की गयी याचिका में जेलियांग ने दलील दी है कि विधायकों को दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 2 (1) (बी) के तहत अयोग्य घोषित किया जाए क्योंकि वे पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए गत 19 जुलाई को विधानसभा की आपात बैठक से अनुपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये विधायक सदन की आपात बैठक के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ थे क्योंकि उन्हें इसकी पूरी जानकारी दे दी गयी थी। निवर्तमान मुख्यमंत्री शुरहोजेली लिजित्सु के खिलाफ 36 एनपीएफ विधायकों सहित 47 विधायकों के बगावत करने के बाद जेलियांग को गत 19 जुलाई को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी गयी थी। उन्होंने 21 जुलाई को विश्वास मत जीत लिया था।

कोहिमा: नगालैंड के मुख्यमंत्री शुरहोजेली लिजित्सू शक्ति परीक्षण के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे। उसके बाद विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस मामले में स्‍पीकर ने गवर्नर को रिपोर्ट भेजी। उसके बाद गवर्नर ने टीआर जेलियांग को एक बार फिर से इस पूर्वोत्‍तर राज्‍य का मुख्‍यमंत्री नियुक्‍त किया है। दरअसल लिजित्सू मौजूदा 59 सदस्यीय विधानसभा में नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग के नेतृत्व में सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट के 43 विधायकों की बगावत का सामना कर रहे थे। इससे पहले मंगलवार को गौहाटी हाई कोर्ट द्वारा विश्वासमत हासिल करने के राज्यपाल के निर्देश पर रोक लगाने वाली याचिका ठुकराए जाने के बाद नगालैंड के मुख्यमंत्री शरहोजेली लिजित्सू को बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र में शक्ति परीक्षण से गुजरना था। इससे पहले राज्यपाल पीबी आचार्य ने अपने पार्टी के विधायकों की बगावत का सामना कर रहे मुख्यमंत्री के शक्ति परीक्षण के लिए मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष इम्तीवापांग को बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे विधानसभा का आपात विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिया था।

कोहिमा: नगालैंड के मुख्यमंत्री शुरहोजेली लिजित्सू शक्ति परीक्षण के लिए नहीं विधानसभा नहीं पहुंचे। उसके बाद विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस मामले में स्‍पीकर, गवर्नर को रिपोर्ट भेज रहे हैं। दरअसल मंगलवार को गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा विश्वासमत हासिल करने के राज्यपाल के निर्देश पर रोक लगाने वाली याचिका ठुकराए जाने के बाद नगालैंड के मुख्यमंत्री शरहोजेली लिजित्सू को बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र में शक्ति परीक्षण से गुजरना था। इससे पहले राज्यपाल पीबी आचार्य ने अपने पार्टी के विधायकों की बगावत का सामना कर रहे मुख्यमंत्री के शक्ति परीक्षण के लिए मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष इम्तीवापांग को बुधवार सुबह साढ़े नौ बजे विधानसभा का आपात विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दिया था। इससे पहले मंगलवार को दिन में गौहाटी उच्च न्यायालय की कोहिमा पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल एम जमीर ने लिजित्सू की रिट याचिका ठुकरा दी जिसमें उन्होंने विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने के राज्यपाल के निर्देश पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इसमें कोई दम नहीं है और इसके साथ ही निर्देश देने के अपने अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया एवं मामले को राज्यपाल के विवेकाधिकार पर छोड़ दिया। अदालत ने कहा, ''इस अदालत की राय है कि राज्यपाल ने यह देखने के लिए याचिकाकर्ता (लिजित्सू ) को सदन में शक्ति परीक्षण के लिए कहकर सही फैसला किया कि मुख्यमंत्री पद के दावे के लिए सदन में किसके पास बहुमत है।'' अदालत ने यह भी कहा कि मामले में मुख्यमंत्री को राज्यपाल के निर्देश में दखल देने का कोई कारण नहीं है।

नई दिल्ली: नागालैंड के मोन ज़िले में सेना ने तीन उग्रवादियों को मार गिराया है। सेना की उग्रवादियों के साथ यह मुठभेड़ मंगलवार रात 11.30 शुरू हुई। मुठभेड़ तब शुरू हुई जब उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया। इस ऑपेरशन में टेरीटोरियल आर्मी का एक ऑफिसर शहीद हो गया है। इस कार्रवाई में तीन जवान भी घायल हो गए हैं। सेना और उग्रवादियों के बीच गोलीबारी में एक आम आदमी की मौत भी हो गई है। वैसे अभी तक इसके पीछे कौन-सा ग्रुप है इसका पता नहीं चल पाया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो खापलांग या एनडीएफबी जैसे पुराने ग्रुपों का हाथ न होकर किसी तीसरे ग्रुप का इस हमले में हाथ हो सकता है। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि कल रात टीजिट सर्किल के लप्पा में हुई मुठभेड़ में असम राइफल्स के तीन जवान भी घायल हो गए। प्रवक्ता ने बताया कि एनएससीएन(के) कैडरों के इलाके से गुजरने की सूचना मिलने पर असम राइफल्स के जवानों ने रात करीब 11 बजे लप्पा में छापेमारी की जिसके बाद वहां मुठभेड़ शुरू हो गई। मुठभेड़ कई घंटों तक चली।

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