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गुवाहाटी: नगालैंड के मोन जिले में सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज के एक असफल अभियान के दौरान 14 युवाओं की दुखद मौत के एक हफ्ते बाद, पीड़ित परिजनों और ग्रामीणों ने फैसला किया है कि जब तक सेना के आरोपी जवानों को न्याय प्रक्रिया के दायरे में लाने की कार्रवाई नहीं हो जाती और विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को हटा नहीं दिया जाता, तब तक कोई सरकारी मुआवजा नहीं लेंगे। रविवार (12 दिसंबर) को यह फैसला मोन जिले के ओटिंग गांव में मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने लिया। सेना के असफल ऑपरेशन में मरने वाले 14 लोगों में से 12 इसी गांव के रहने वाले थे।

ओटिंग की ग्राम परिषद द्वारा जारी एक बयान में स्पष्ट किया गया है कि उनके पास एक मंत्री और जिले के उपायुक्त द्वारा 1,83,000 रुपये का एक लिफाफा लाया गया था। बयान में कहा गया है, "ग्राम परिषद ओटिंग इसे माननीय मंत्री पाइवांग कोन्याक का प्यार और उपहार के प्रतीक के रूप में मानती है।"  उनका कहना है कि उन्हें बाद में पता चला कि यह  राज्य सरकार द्वारा भुगतान की जाने वाली मुआवजे की अग्रिम किस्त का भुगतान था।

कोहिमा: नगालैंड में बेकसूर ग्रामीणों की सुरक्षाबलों के हाथों मौत का मामला गरमाता जा रहा है। शनिवार को नगालैंड की राजधानी कोहिमा में बड़ा विरोध प्रदर्शन निकाला गया। इसमें गृह मंत्री अमित शाह और अफस्पा कानून के खिलाफ लोगों की नाराजगी देखी गई। मालूम हो कि नगालैंड के मोन जिले में पिछले हफ्ते सेना के हाथों मुठभेड़ में हुई चूक के दौरान 8 ग्रामीण मारे गए थे। इसके बाद भड़की हिंसा में 6 और ग्रामीणों की मौत हुई थी, जबकि एक सैनिक की जान गई थी।

मोन जिले में प्रदर्शनकारियों ने संसद में पिछले हफ्ते दिए गए अमित शाह के बयान को झूठा और बनावटी करार दिया और उनसे माफी की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने उनका पुतला जलाया और अपना आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अफस्पा को नगालैंड से तुरंत हटाया जाना चाहिए। उन्हें आशंका है कि अफस्पा का इस्तेमाल इस मामले में शामिल सैनिकों को बचाने के लिए किया जा सकता है।

प्रदर्शन करने वालों में ओटिंग गांव के ग्रामीण भी शामिल थे, जिनके समुदाय के लोग उस घटना में मारे गए थे। ये जनजातियां कोनयाक समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से माफी की मांग की है।

गुवाहाटी: नगालैंड में पैरा स्पेशल फोर्सेज के एक असफल सैन्य ऑपरेशन में 14 ग्रामीणों की मौत पर संसद में सोमवार (06 दिसंबर) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन के बाद, नगा जनजाति, जिससे मारे गए अधिकांश लोगों का ताल्लुक था, ने त्वरित और सख्त कदम उठाए जाने से जुड़ी मांगों का पांच-सूत्रीय ज्ञापन जारी किया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार सेना कर्मियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो और राज्य में सेना और सुरक्षा बलों को दी गई विशेष शक्तियों को वापस लिया जाय।

नगालैंड के मोन जिले, जहां ये घटना हुई है, के कोन्याक में नगा जनजाति का शीर्ष निकाय है। इसी निकाय ने सरकार को मांगों का एक ज्ञापन भेजा है। निकाय की पहली मांग है कि सक्षम जांच एजेंसी के तहत तत्काल स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन किया जाए। निकाय ने यह भी मांग की है कि इस घटना की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के दो सदस्य नगा नागरिक समाज से होने चाहिए। कोन्याक संघ ने मांग की है कि घटना में शामिल सभी सैन्य कर्मियों पर देश के कानून के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

कोहिमा: नगालैंड के मोन जिले में सुरक्षाबलों द्वारा आम नागरिकों पर फायरिंग के सिलसिले में पुलिस ने भारतीय सेना के 21 पैरा विशेष बलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नगालैंड पुलिस ने आर्मी यूनिट के खिलाफ अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि सेना के 21 पैरा स्पेशल बलों ने असम सीमा के पास नागालैंड के मोन जिले के ओटिंग में अंधाधूंध फायरिंग की, जिसके परिणामस्वरूप 13 ग्रामीणों की मौत हो गई। एफआईआर में पुलिस ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों का इरादा नागरिकों की हत्या करना और उन्हें घायल करना था।

एनडीटीवी ने दावा किया है कि उसके पास एफआईआर की कॉपी है। राज्य पुलिस द्वारा दायर प्राथमिकी में कहा गया है, 'यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि घटना के समय कोई पुलिस गाइड नहीं था और न ही सुरक्षा बलों ने उग्रवादियों के खिलाफ अपने ऑपरेशन के लिए गाइड प्रदान करने के लिए पुलिस थाने से मांग की थी। इसलिए यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बलों का इरादा नागरिकों की हत्या करना और उन्हें घायल करना ही था।' बता दें कि इस मामले में राज्य सरकार की ओर से एसआईटी टीम गठित कर दी गई है।

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