ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

कोहिमा: नगालैंड (में सुरक्षा बलों के एक आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में 'गलत पहचान' के चलते 13 स्थानीय लोग मार गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मरने वालों की संख्या करीब एक दर्जन है। वहीं, सुरक्षा बल का एक जवान की भी मौत हो गई। घटना म्यांमार की सीमा से लगे नागालैंड के मोन जिले के ओटिंग गांव की है।

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने शांति की अपील करते हुए रविवार सुबह ट्वीट किया कि राज्य के मोन जिले के ओटिंग गांव में 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' की वजह से 'नागरिकों की हत्या' हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय विशेष जांच दल इसकी जांच करेगा। सीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'मोन के ओटिंग में दुर्भाग्यपूर्ण घटना में नागरिकों की हत्या अत्यंत निंदनीय है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। उच्च स्तरीय एसआईटी जांच करेगी और देश के कानून के मुताबिक न्याय मिलेगा। सभी वर्गों से शांति की अपील।'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना पर दुख जाहिर किया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'नगालैंड के ओटिंग, मोन में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना से दुखी हूं।

कोहिमा: नागालैंड सरकार 2030 तक गरीबी खत्म करने के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के जरिए कौशल विकास और रोजगार सृजन पर खासतौर से ध्यान केंद्रित करेगी और इसके लिए सरकार ने सीएसआर फंड सहित विभिन्न वित्तीय स्रोतों की संभावनाएं तलाशने की योजना बनाई है। एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि एक विजन दस्तावेज के अनुसार नेफियू रियो सरकार गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और वित्त पोषण एजेंसियों से ऋण हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

अधिकारी ने बताया कि रियो ने बुधवार को राज्य की आर्थिक वृद्धि के लिए स्थानीय वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के संबंध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। एक अनुमान के मुताबिक नागालैंड में 18.88 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करते हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में ‘‘नागालैंड एसडीजी विजन 2030-दस्तावेज'' जारी किया। इसका मकसद राज्य में सभी को आगे बढ़ाना है।

कोहिमा: सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहे नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) ने सोमवार को कहा कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फरवरी में पत्र लिखा था और कहा था कि यदि "भारत में उसकी मौजूदगी का स्वागत नहीं है" तो विदेश में बातचीत की जानी चाहिए। आठ पन्ने के "गोपनीय" पत्र में वार्ताकारों, नागालैंड के गवर्नर आरएन रवि और गृह मंत्रालय की कड़ी आलोचना करते हुए समूह ने अलग झंडे और संविधान की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

एनएससीएन (आईएम) के बयान के मुताबिक, सात महीने पहले,  संगठन के राष्ट्रीय महासचिव टी मुईवाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। हमने अब तक चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं किया था क्योंकि हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी सकारात्मक जवाब देंगे। आज, एनएससीएन (आईएम) ने नागा लोगों के प्रति जवाबदेह होने के कारण भारतीय प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से जवाब नहीं मिलने और देरी होने के बारे में जानकारी देने के लिए पत्र जारी किया।"

नई दिल्ली: केंद्र ने एनएससीएन-आईएम की नगालैंड के लिए अलग ध्वज, अलग संविधान की मांग को खारिज कर दी है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि विद्रोही समूह के साथ बंदूकों के साए में वार्ता स्वीकार्य नहीं है। नगा वार्ता के लिए सरकार के वार्ताकार और राज्यपाल आरएन रवि ने कहा केंद्र सरकार दशकों लंबी नगा शांति प्रक्रिया को बिना किसी विलंब के पूरा करने को प्रतिबद्ध है।

राज्यपाल ने कहा, सभी मुद्दों सहित एक परस्पर सहमति वाला व्यापक हल अंतिम समझौते को रूप देने के लिए तैयार है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे मौके पर एनएससीएन-आईएम समझौते को लटकाने का रवैया अपना रहा है। उसने नगा राष्ट्र ध्वज व संविधान जैसे विवादस्पद मुद्दे उठाए हैं, जबकि वह भारत सरकार के रुख से अच्छी तरह वाकिफ है। गौरतलब है कि एनएसीएन-आईएम के महासचिव थुइंगलेंग मुइवा और आरएन रवि के तीन अगस्त, 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एक रूपरेखा के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख