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इंफाल: मणिपुर में स्थायी शांति की मांग कर रहे हजारों लोगों की शनिवार को पुलिस से झड़प हुई, जब उन्हें यहां मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने से रोका गया। हालांकि, बाद में प्रदर्शनकारियों के एक समूह को मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह से मिलने की अनुमति दी गई और उन्होंने इस मामले पर एक ज्ञापन सौंपा।

मेइती संगठन कोकोमी (कोआर्डिनेटिंग कमेटी आन मणिपुर इंटीग्रिटी) के तत्वावधान में प्रदर्शनकारियों ने चार अलग-अलग रैलियां निकालीं, जिन्हें बाबुपारा क्षेत्र में मुख्यमंत्री के बंगले से पहले विभिन्न स्थानों पर रोक दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाले सभी मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए, जिनमें इंफाल के मध्य में स्थित कीसमपत जंक्शन, कांगला गेट, कोनुंग मामांग और मोइरांगखोम शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के बंगले से दो किलोमीटर दूर खुराई लामलॉन्ग में पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे।

इंफाल: मणिपुर में अलग-अलग जातीय संगठनों द्वारा बुधवार को बुलाए गए बंद के कारण राज्य के 16 में से 12 जिलों में आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में सात अप्रैल को हुए बम हमले के विरोध में संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) द्वारा बुलाए गए पांच-दिवसीय बंद के चौथे दिन, घाटी के सभी पांच जिले प्रभावित रहे। इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी।

स्कूल-बैंक, बाजार बंद, सड़कों पर सन्नाटा

अधिकारियों ने बताया कि इस आंदोलन के तहत इंफाल पश्चिम जिले के सगोलबंद और पात्सोई सहित कई इलाकों से सड़कों पर अवरोध की खबरें मिलीं।

यूनाइटेड नगा काउंसिल द्वारा बुलाए गए तीन-दिवसीय पूर्ण बंद के दूसरे दिन, छह पहाड़ी जिलों में नगा-बहुल इलाकों में भी आम जनजीवन प्रभावित हुआ। यह बंद 18 अप्रैल को उखरुल जिले के टीएम कासोम में घात लगाकर किए गए हमले में दो तांगखुल नगा लोगों की हत्या के विरोध में था।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा के मामलों पर सुनवाई की। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह जातीय हिंसा से जुटी 11 एफआईआर की जांच पर दो हफ्ते के अंदर स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के बजाय मणिपुर हाई कोर्ट या गुवाहाटी हाई कोर्ट को इन मामलों के ट्रायल और जांच की निगरानी करनी चाहिए। बेंच के अनुसार, मणिपुर हाई कोर्ट में अब नए चीफ जस्टिस आ चुके हैं, इसलिए वे स्थानीय हालात को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।

कोर्ट ने पुनर्वास पर दिए निर्देश

कोर्ट ने केंद्र और मणिपुर सरकार को निर्देश दिया कि वे जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की सिफारिशों को हर हाल में लागू करें। यह कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए बनाई गई थी। इस कमेटी में तीन पूर्व महिला जज शामिल हैं, जो अब तक पीड़ितों की मदद के लिए कई रिपोर्ट सौंप चुकी हैं।

इंफाल: मणिपुर के उखरूल जिले में एक बार फिर हिंसा भड़कने की खबर सामने आई है। सशस्त्र बदमाशों द्वारा गांवों में आगजनी और फायरिंग की घटनाओं के बाद प्रशासन ने हालात को काबू में करने के लिए पूरे जिले में कर्फ्यू लागू कर दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले में पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं।

'आज तक' ने प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि उखरूल जिले के लिटन सारेइखोंग गांव में कुछ हथियारबंद बदमाशों ने कई घरों में आग लगा दी। इस घटना के दौरान पहाड़ी इलाके के पास हवा में कई राउंड फायरिंग भी की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। गोलीबारी और आगजनी के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई।

डर के माहौल में गांव छोड़ने को मजबूर हुए लोग

हिंसा के बाद कई ग्रामीण अपने जरूरी सामान के साथ सुरक्षित इलाकों की ओर निकल पड़े। बताया जा रहा है कि कुछ लोग पड़ोसी कांगपोकपी जिले की ओर भागे हैं।

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