जम्मू: सियाचिन ग्लेशियर स्थित एक सैन्य चौकी के हिमस्खलन की चपेट में आ जाने के बाद एक दिन से भी ज्यादा समय से बर्फ में फंसे 10 सैनिकों के मिलने की संभावना अब क्षीण लग रही है। हालांकि उनका पता लगाने के लिए आज विशेषज्ञ टीमों, खोजी कुत्तों और उपकरणों के साथ बचाव अभियान तेज कर दिया गया। उत्तरी कमान के रक्षा जनसंपर्क अधिकारी कर्नल एस. डी. गोस्वामी ने एक बयान में कहा, ‘‘बचाव दल बहुत खराब मौसम और प्रतिकूल वातावरण का सामना कर हादसे में जीवित बचे लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने में जुटा हुआ है। हालांकि, हमें बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि अब किसी के जीवित मिलने की संभावना बहुत क्षीण है।’’ लद्दाख क्षेत्र में कल उत्तरी ग्लेशियर सेक्टर में 19,600 फुट पर स्थित एक चौकी हिमस्खलन की चपेट में आ गयी थी। हिमस्खलन में एक जेसीओ और नौ जवान फंस गये थे। लापता कर्मी चौकी पर तैनात मद्रास बटालियन के हैं जो अब कई टन बर्फ के नीचे दब गये हैं।
कर्नल गोस्वामी ने बताया कि सेना और वायुसेना के विशेषज्ञ दलों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियान के दूसरे दिन आज सुबह विशेष उपकरण विमान से लेह पहुंचाए गए। उन्होंने बताया कि ग्लेशियर पर तापमान रात को शून्य से नीचे 42 डिग्री सेल्सियस से लेकर दिन में शून्य से नीचे 25 डिग्री सेल्सियस तक होता है। उन्होंने बताया कि चौकी पर बर्फ के बड़े टुकड़े के गिरने के कारण वह बहुत नीचे धंस गयी है। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने कहा, ‘‘इसे हटाना काफी मुश्किल काम है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘कल के प्रयासों से आगे बढ़ते हुये चौकी तक पहुंचने के लिए आज एक विशाल बचाव दल तैनात किया गया।’’ उन्होंने बताया, ‘‘लापता सैनिकों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ टीमों और उपकरण के साथ बचाव अभियान शुरू किया गया है।’’ बर्फ साफ करने और उसे काटने के लिए बर्फ काटने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।