नई दिल्ली: आय से अधिक संपत्ति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी तथा अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इससे पहले वीरभद्र सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट से भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई की ओर से दायर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने सिंह की मांग खारिज कर दी। इसके बाद दिल्ली की अदालत में वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ है। सिंह ने अपनी याचिका में अदालत से अनुरोध किया था कि वह उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 13 (2) और 13 (1) और आईपीसी की धारा 109 के तहत सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने का निर्देश दे। इसके साथ ही उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि वह प्राथमिक जांच और प्राथमिकी के रिकॉर्ड तलब करे। सीबीआई ने 23 सितंबर 2015 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में सीबीआई अब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तथा उनकी धर्म पत्नी एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह से न केवल पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र है, वह उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है। चार्जशीट दायर होने के बाद सीबीआई अतिरिक्त पूछताछ के लिए उन्हें गिरफ्तार करने की पटीशन डाल सकती है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते वर्ष मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की याचिका पर फैसले को सुरक्षित रख लिया था।
वीरभद्र सिंह के परिवार के खिलाफ भी सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी। सीबीआई ने वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। वीरभद्र सिंह पर केंद्र में स्टील मंत्री रहते हुए 6.1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति बनाने का आरोप है। मामले में वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, बेटा बिक्रमादित्य सिंह और बेटी अपराजिता भी आरोपी है। कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के ताजा फैसले के मद्देनजर उनके इस्तीफे की संभावना से स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया है और आरोप लगाया कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संसद भवन में पार्टी के नियमित संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में सवाल किये जाने पर कहा, ‘निश्चित तौर पर नहीं। यह तो बहुत पुराना मामला चल रहा है। अभी सिर्फ आरोपपत्र दायर हुए हैं। इस मामले में विभिन्न अदालतों के आदेश आए हैं।’उन्होंने कहा, ‘वीरभद्र सिंह शुरू से यह कह रहे हैं कि यह मनगढंत और बनाया गया मामला है। यह राजनीतिक प्रतिशोध से किया गया मामला है।’