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ब्यूनस आयर्स: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के साथ गहरे मतभेदों के कारण अपने देश के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अलग होने का एलान किया है। राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने बुधवार को यह जानकारी दी। माइली की कार्रवाई उनके सहयोगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदम से मेल खाती है, जिन्होंने 21 जनवरी को पदभार ग्रहण करने के पहले दिन ही एक कार्यकारी आदेश के जरिये अमेरिका को डब्ल्यूएचओ से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
ब्यूनस आयर्स में संवाददाता सम्मेलन में प्रवक्ता मैनुअल एडोर्नी ने कहा कि अर्जेंटीना का निर्णय ‘‘स्वास्थ्य प्रबंधन में गहरे मतभेदों पर आधारित है, खासकर (कोविड19) महामारी के दौरान।’’ उन्होंने कहा कि उस समय डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के कारण ‘‘मानव जाति के इतिहास में सबसे बड़ा शटडाउन’’ हुआ था। एडोर्नी ने कहा कि अर्जेंटीना किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन को अपनी संप्रभुता में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगा, ‘‘और हमारे स्वास्थ्य क्षेत्र में तो बिल्कुल भी नहीं।’’
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ढाका: शेख हसीना के ऑनलाइन संबोधन से कुछ मिनट पहले ही छात्रों की हिंसक भीड़ ने ढाका के धानमंडी-32 में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक घर में तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। इस समय बड़े पैमाने पर हिंसा जारी है।
अवामी लीग के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन से पहले भड़की हिंसा
बांग्लादेश में अवामी लीग के प्रस्तावित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन से पहले कई शहरों में बुधवार देर रात फिर हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान 'बंगबंधु' के ढाका स्थित धनमंडी-32 आवास पर धावा बोला और तोड़फोड़ की।
उधर, खुलना में शेख हसीना के चचेरे भाई शेख सोहेल, शेख जेवेल के घरों को दो बुलडोजरों से ध्वस्त कर दिया गया है। हिंसा सोशल मीडिया पर ‘बुलडोजर जुलूस’ के ऐलान के बाद हुई। जब हमला हुआ, तब वहां सुरक्षाबल भी मौजूद थे। भीड़ को वहां से जाने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन सारी कोशिशें नाकाम रहीं।
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वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संकल्प और नीतियों का असर दिखना शुरू हो गया है। बीते 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभालने के बाद ट्रंप ने अवैध प्रवासियों को अमेरिका से निकाले जाने संबंधी कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस पर अमल करते हुए अमेरिकी प्रशासन ने सी-17 सैन्य विमान से कई भारतीय लोगों के एक समूह को अमेरिका से वापस भेज दिया है। भारतीयों को अमेरिका से निकाले जाने की यह ताजा खबर ट्रंप प्रशासन की सख्ती दिखाता है। बता दें कि बीते दो हफ्ते की अवधि में भारत के अलावा भी कई देशों के अवैध प्रवासियों को अमेरिका से निर्वासित किया जा चुका है।
टेक्सास से रवाना हुआ विमान, सी-17 की क्षमता 140 यात्री
सी-17 सैन्य विमान से भारत लौटाए जा रहे प्रवासियों के बारे में मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों पर अमल करते हुए अमेरिका आव्रजन कानूनों को कड़ा कर रहा है।
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वाशिंगटन: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने घोषणा की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से इम्पोर्ट पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ को 30 दिनों के लिए रोकने पर सहमति व्यक्त की है। यह फैसला मैक्सिको से इम्पोर्ट पर भी इसी तरह की रोक के बाद लिया गया, जब दोनों देशों ने अमेरिका में फेंटेनाइल तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति जताई।
शनिवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि वे कनाडा और मैक्सिको से इम्पोर्टेड सामानों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाएंगे और चीन से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव भी किया। उन्होंने कनाडा से आयातित ऊर्जा संसाधनों पर भी 10 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना बनाई थी। हालांकि, ट्रूडो ने चेतावनी दी थी कि अगर यह टैरिफ लागू होते हैं, तो कनाडा $155 बिलियन के अमेरिकी सामानों पर 25 फीसदी टैरिफ लागू करेगा। लेकिन सोमवार को ट्रूडो ने ट्वीट करके बताया कि ट्रंप के साथ उनकी बातचीत सफल रही और 30 दिनों की टैरिफ रोक का फैसला लिया गया। इस रोक का एक मुख्य कारण फेंटेनाइल तस्करी को रोकने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
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