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गांधीनगर: गुजरात के भावी मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने आज (शनिवार) राज्यपाल ओ पी कोहली से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। रूपानी को शुक्रवार को को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रभारी दिनेश शर्मा ने ऐलान किया कि रूपानी रववार को दोपहर 12:40 बजे शपथ-ग्रहण करेंगे। रूपानी के अलावा शर्मा और उप-मुख्यमंत्री नियुक्त किए गए नितिन पटेल सहित राज्य के कई अन्य नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की। बहरहाल, निवर्तमान मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल इस मुलाकात के दौरान मौजूद नहीं थीं। मुलाकात के बाद शर्मा ने कहा, ‘हमने राज्यपाल को बताया कि भाजपा विधायक दल ने नए मुख्यमंत्री के तौर पर विजय रूपानी और उप-मुख्यमंत्री के तौर पर नितिन पटेल के नामों का समर्थन किया है।’ शर्मा ने कहा, ‘राज्यपाल ने शपथ ग्रहण के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। शपथ ग्रहण रविवार को दोपहर 12:40 मिनट पर आयोजित किया जाएगा।’ बहरहाल, उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया कि जब रूपानी और अन्य नेता सरकार बनाने का दावा पेश करने गए तो उस वक्त आनंदीबेन क्यों गैर-मौजूद थीं। शर्मा ने सिर्फ इतना कहा, ‘जब उन्होंने इस्तीफा दिया उस वक्त वह मौजूद थीं। आज वे मौजूद थे जिन्हें चुना गया है।’ पार्टी ने इस बात के भी संकेत नहीं दिए कि रूपानी और पटेल के साथ और कौन-कौन शपथ लेगा। पार्टी ने कहा कि इन चीजों पर काम चल रहा है।

अहमदाबाद: काफी जदोजहद के बाद आखिर मोदी अपने नज़दीकी को गुजरात की कमान सौंपने में कामयाब हो गए। इस बार भी मोदी पार्टी पर अपनी पकड़ का संदेश देने में सफल रहे। नतीजतन गुजरात भाजपा के अध्यक्ष विजय रूपानी राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे, जबकि नितिन पटेल उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। अहमदाबाद में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक नितिन गडकरी ने रूपानी के नेता चुने जाने की घोषणा की। आखिरी दो घंटे के घटनाक्रम में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने रूपानी के नाम का फैसला किया और नए नेता की दौड़ में आगे माने जा रहे पटेल को उप मुख्यमंत्री से संतोष करना पड़ा। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बीते दो दिन में सभी विधायकों व प्रदेश के प्रमुख नेताओं से चर्चा कर नए नेता के लिए उनकी राय जानी थी। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय पर्यवेक्षक नितिन गडकरी से विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार विधायक दल की बैठक से पहले शाह और गडकरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की, जिसके बाद रूपानी के नाम का फैसला किया गया। आनंदी बेन पटेल सरकार में नंबर दो रहे और इस बार नेता पद की दौड़ में आगे रहे नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया गया। दोनों के नामों का प्रस्ताव निवर्तमान मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने किया, जिसका सर्वसम्मति से समर्थन किया गया। दरअसल गुजरात में अब सत्ता संघर्ष शुरू हो चुका है।

अहमदाबाद: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने गुरुवार को गुजरात पहुंचकर कथित गोरक्षकों के अत्याचार के शिकार दलितों से मुलाकात की। उन्होंने दलितों पर हमले की बढ़ती घटनाओं के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जिम्मेदार ठहराया। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने 11 जुलाई को उना में क्रूर हमले के शिकार चार दलितों से एकजुटता दिखाने सिविल अस्पताल पहुंचीं। अपने समर्थकों की वाहवाही के बीच मायावती गुजरात सरकार और कांग्रेस दोनों पर बरसीं। उन्होंने कहा कि जब तक उन्होंने यह मामला संसद में नहीं उठाया तब तक दोनों इस मुद्दे पर मौन रहीं। उन्होंने कहा कि यदि इन चारों को नई दिल्ली ले जाने की जरूरत पड़ी तो बहुजन समाज पार्टी इनके इलाज का खर्च वहन करेगी। सात दलितों के परिवार को गिर सोमनाथ जिले में एक मरी हुई गाय की खाल उतारने पर मोटा सामाधियाला गांव के पास निगरानी समिति के सदस्यों ने पिटाई की थी। इन सदस्यों ने बाद में इनमें से चार युवकों को उना शहर ले गए थे और उन्हें एक एसयूवी से बांध कर पिटाई की थी और उन्हें खींच कर पुलिस थाने ले गए थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था जो पूरे देश में आक्रोश का कारण बना। मायावती कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद पीड़ितों से मिलने आने वाली नेता हैं।

अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने गुरूवार को कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी जिसने आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण अध्यादेश को रद्द कर दिया है। वहीं पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने फैसले का स्वागत किया और ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण आंदोलन को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। स्वास्थ्य मंत्री और गुजरात सरकार के प्रवक्ता नितिन पटेल ने कहा कि वे ईबीसी आरक्षण के प्रावधानों का पालन करेंगे और हाई कोर्ट के फैसले को यथाशीघ्र सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। पटेल ने कहा, ‘जब हमने 10 फीसदी ईबीसी आरक्षण की घोषणा की तो हमारी सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईबीसी आरक्षण के इन प्रावधानों का हम किसी भी स्थिति में पालन करेंगे। हम हाई कोर्ट के आज के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।’ आरक्षण की घोषणा संख्या और सामाजिक आधार पर मजबूत पटेल समुदाय को शांत करने के लिए की गई थी। हार्दिक पटेल और लालजी पटेल द्वारा शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग के बाद उन्हें संतुष्ट करने के लिए इस आरक्षण का प्रावधान किया गया। उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हार्दिक ने कहा, ‘अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईबीसी आरक्षण असंवैधानिक है। हम आदेश का स्वागत करते हैं क्योंकि हम हमेशा संविधान के तहत आरक्षण चाहते हैं।’

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