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भरूच: बुधवार देर रात दहेज में गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कम्पनी के टीडीआई प्लान्ट में गैस रिसाव हुआ, जिसकी वजह से 4 मज़दूरों की मौत हो गई है और करीब 10 से ज्यादा मज़दूरों पर इसका असर हुआ है। जिनका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जीएनएफसी का ये सबसे बड़ा प्लान्ट है और यहीं से उसकी 60 प्रतिशत के करीब कमाई आती है। ये कुछ सालों पहले कमीशन किया गया था। 2014 के जनवरी में भी यहां पर फोस्जीन गैस का रिसाव हुआ था लेकिन उस वक्त किसी को नुकसान नहीं हुआ था। लेकिन बुधवार रात जब गैस रिसाव हुआ तो उस वक्त कम्पनी में काम कर रहे मज़दूरों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। फोस्जीन ज़हरीली गैस है और इसका रिसाव अगर ज्यादा हो जाय तो आसपास के इलाकों के लिए भी ये जानलेवा साबित हो सकता है। इसका प्रभाव कितना खतरनाक होता है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 17 मज़दूरों को पास के अस्पताल कम्पनी के ही एम्बुलेन्स में ले जाया गया, लेकिन 4 लोगों के श्वसन प्रणाली में इसका असर इतना बढ़ गया था कि उनकी मौत हो गई। इस इलाके में दो साल में दो बार गैस रिसाव की समस्या सामने आने से लोगों में जीएनएफसी प्लान्ट को लेकर चिंता है। गुजरात पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड ने भी अपने अधिकारी भेजकर पूरी घटना की जांच शुरू करवा दी है।

अंकलेश्वर (गुजरात): राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि भारत के लिए आवश्यक है कि वह अपने सभी नागरिकों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली उपलब्ध कराए, ताकि दुनिया में उचित स्थान हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि महज उच्च जीडीपी दर पर्याप्त नहीं है. हमें सभी के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक स्वास्थ्य प्रणाली सुनिश्चित करने की जरूरत है। गुजरात के भरूच जिले में सरदार पटेल मल्टी स्पेशलिटी और हार्ट हॉस्पिटल का उद्घाटन करने के बाद राष्ट्रपति ने कहा, 'बिना सक्षम शरीर के सक्षम दिमाग काम नहीं कर सकता। विकसित देशों में उचित स्थान हासिल करने के लिए यह पूरी तरह आवश्यक है।' अस्पताल को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने बनवाया है जिसका नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने किया। राष्ट्रपति ने कहा कि बीमारी और रोगग्रस्त लोगों वाला देश विश्व में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, 'अगर हम बीमार हैं, भूखे हैं और कौशल युक्त नहीं हैं... तो फिर जीडीपी के अच्छे आंकड़े और अन्य सांख्यिकी आंकड़े संतोषजनक नहीं होंगे और सही तस्वीर सामने नहीं आएगी।' उन्होंने कहा कि देश को अपने सभी नागरिकों के लिए नौकरी और आजीविका का इंतजाम करना होगा। जिसमें लोगों की 'सामूहिक भागीदारी' आवश्यक है।

वडोदरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षित हमले की उपमा का इस्तेमाल करते हुए शनिवार को यह जिज्ञासा जतायी कि यदि सरकार ने कालेधन के खिलाफ हाल के उस अभियान में ऐसी ही रणनीति का इस्तेमाल किया होता तो क्या होता, जिसमें 65 हजार करोड़ रुपये का पता लगा। मोदी ने कहा, ‘हमने कालाधन कमाने वालों को (उसे घोषित करने के लिए) कुछ समय दिया था। आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि कर एवं दंड चुकाकर 65 हजार करोड़ रुपये कालाधन मुख्यधारा में सामने आया।’ उन्होंने कहा, ‘अब सोचिये कि 36 हजार करोड़ रुपये जिसका रिसाव हो रहा था उसे (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के जरिये रोक दिया गया, और 65 हजार करोड़ रुपये कालाधन का पता चला। दोनों मिलाकर यह एक लाख करोड़ रुपये होता है।’ उन्होंने हाल में सेना द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ संचालित अभियान के लिए इस्तेमाल शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘यह एक लाख करोड़ रुपये लक्षित हमला किये बिना वापस लाया गया।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘यदि हम (इस क्षेत्र में) लक्षित हमला करें, आप कल्पना कर सकते हैं कि क्या सामने आएगा।’ मोदी ने कहा कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सतत लड़ाई शुरू की है।

अहमदाबाद: गुजरात हाई कोर्ट ने आज (गुरूवार) 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए सरदारपुरा नरसंहार मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराये गये 31 लोगों में से 14 को बरी कर दिया और 17 अन्य की उम्रकैद की सजा पर मुहर लगा दी। सरदारपुरा कांड में 33 लोगों को जिंदा जला दिया गया था। गौरतलब है कि अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि अल्पसंख्यक समुदाय पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया था और गोधरा ट्रेन कांड के बाद साजिश रची गयी थी। न्यायमूर्ति देवानी और न्यायमूर्ति बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने 17 लोगों की उम्रकैद की सजा पर मुहर लगाई। हालांकि निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराये गये 31 लोगों में से 14 को उच्च न्यायालय ने सबूतों की कमी के करण बरी कर दिया। सरदारपुरा मामले में पुलिस ने 76 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से दो की मौत मुकदमे की सुनवाई के दौरान हो गयी, वहीं एक किशोर था। अदालत ने जून 2009 में 73 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये थे और मामले में मुकदमा शुरू किया। निचली अदालत ने 31 को दोषी ठहराने के अलावा 42 अन्य को बरी कर दिया था। एसआईटी ने बाद में इन 42 में से 31 लोगों को बरी किये जाने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। हालांकि उच्च न्यायालय ने इन 42 में से 31 लोगों को बरी करने के मेहसाणा जिला अदालत के आदेश को बरकरार रखा। इस बीच उच्च न्यायालय ने 17 लोगों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

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