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पणजी: केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने गोवा के राज्‍यपाल से मुलाकात कर राज्‍य में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हालांकि उन्‍होंने फिलहाल रक्षामंत्री के पद से इस्‍तीफा नहीं दिया है और शपथग्रहण की तारीख तय होने के बाद वो यह पद छोड़ेंगे। पहले मीडिया में ऐसी खबरें आई कि पर्रिकर ने रक्षामंत्री के पद से इस्‍तीफा दे दिया है लेकिन बाद में नितिन गडकरी ने स्थिति स्‍पष्‍ट करते हुए बताया कि शपथग्रहण की तारीख तय होने के बाद ही पर्रिकर रक्षामंत्री का पद छोड़ेंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि एमजीपी और गोवा फॉरवर्ड ने उनसे कहा कि अगर मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बनें तो वो समर्थन देने को तैयार हैं। मैंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष गोवा के विधायकों की बात रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और संसदीय बोर्ड से चर्चा की. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पर्रिकर ने कहा कि पार्टी जो भी फैसला करेगी, वह उन्हें मान्य होगा और अगर गोवा में उनकी जरूरत है तो वह रक्षा मंत्री का पद छोड़ देंगे। गडकरी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष और संसदीय बोर्ड ने मुझे उचित निर्णय लेने का अधिकार दिया था। जब मैं 21 विधायकों के समर्थन के प्रति आश्वस्त हो गया तब राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने दावा पेश किया गया। पर्रिकर शपथ ग्रहण की तारीख तय होने पर रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देंगे।

रविवार शाम गोवा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में पर्रिकर को मुख्‍यमंत्री बनाने के फैसले पर मुहर लगी। पर्रिकर ने राज्‍यपाल से मुलाकात कर गोवा में सरकार बनाने का दावा भी पेश किया है। पर्रिकर ने 21 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। विधायकों के समर्थन का पत्र लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ पर्रिकर राजभवन पहुंचे। गौरतलब है कि बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) ने शर्त रखी थी कि अगर मनोहर पर्रिकर को गोवा का मुख्‍यमंत्री बनाया जाएगा तभी वो समर्थन देगी। एमजीपी के नेता सुधीर ढवलीकर ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा था कि वे भाजपा को सत्ता में लाने के लिए तभी समर्थन दे सकते हैं जब रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को गोवा के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाए। एमजीपी के 3 विधायक चुनकर आए हैं। ढवलीकर गोवा में मीडियाकर्मियों से बात कर रहे थे। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ख़त लिखकर अपनी बात स्पष्ट कर दी थी।

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