ताज़ा खबरें
टैरिफ से सहमा बाजार:सेंसेक्स 931 अंक गिरा, निफ्टी 23000 से फिसला
बजट में दलित-आदिवासी के लिए उचित हिस्सा कानूनन जरूरी हो: राहुल
वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दाखिल
वक्फ विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी कांग्रेस
'वक्फ बिल को थोपा गया, अदालत कर देगी खारिज': अभिषेक सिंघवी
वक्फ विधेयक राज्यसभा से भी पारित,पक्ष में पड़े 128 वोट, विपक्ष में 95

नई दिल्ली: दिल्ली के नगर निगमों के 1500 करोड़ रुपये डीडीए पर बकाया होने के आरोपों का प्राधिकरण ने खंडन किया है। प्राधिकरण की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डीडीए के ऊपर दिल्ली के नगर निगमों की कोई भी धनराशि बकाया नहीं है, बल्कि पार्कों की देखरेख के लिए डीडीए को उल्टा नगर निगमों से धनराशि लेनी है। डीडीए ने अपने बयान में कहा है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा मीडिया में दिए गए बयान में सच्चाई नहीं है। नगर निगमों और डीडीए के बीच प्रॉपर्टी टैक्स को पूरा मामला हाईकोर्ट के समक्ष विचारधीन है। कोर्ट में इस मुद्दे पर 15 फरवरी को सुनवाई होनी है। डीडीए शहरी विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक साल 2015-16 के सभी करों का भुगताग नगर निगमों को कर चुका है।

डीडीए ने इस संबंध में 26.70 करोड़ की धनराशि का भुगतान किया है। इसमें पूर्वी दिल्ली नगर निगम को 6.20 करोड़, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को 8.49 करोड़ और एनडीएमसी को 12.01 करोड़ की धनराशि दी गई है। डीडीए के मुताबिक प्रॉपर्टी टैक्स और दूसरी सेवाओं की समीक्षा के लिए प्राधिकरण को उप राज्यपाल की तरफ निर्देश दिए गए है, ताकि निगमों की मदद की जा सके। डीडीए इस बाबत नगर निगमों से विचार-विमर्श करने को तैयार है।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख