नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट में निजी स्कूलों के प्रबंधन कोटा को भ्रष्टाचार की जड़ बताया है। सरकार ने नर्सरी दाखिला में प्रबंधन कोटा समाप्त किए जाने के अपने निर्णय को जायज बताते हुए कहा कि स्कूल इसके जरिए मुनाफाखोरी करते हैं। जस्टिस मनमोहन के समक्ष सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए निजी स्कूलों में मुनाफाखोरी रोकना उनकी जिम्मेदारी है और दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट-1973 उसे इसका अधिकार भी देता है। अपने फैसले को सही ठहराते हुए सरकार हाईकोर्ट के पिछले सप्ताह के उस फैसले को अपना हथियार बनाया है जिसमें फीस बढ़ोतरी के लिए निजी स्कूलों को सरकार की मंजूरी को अनिवार्य बताया गया है।
सरकार ने कहा है कि इस फैसले में हाईकोर्ट ने उसे निजी स्कूलों में मुनाफाखोरी रोकने का अधिकार है। इसके अलावा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि निजी स्कूलों प्रबंधन कोटा का दुरूपयोग करते हैं, इसलिए इसे सामप्त किया गया है। अपने इस निर्णय का बचाव करते हुए सरकार ने कहा है कि प्रबंधन कोटा में दाखिला देने के लिए निजी स्कूल अभिभावकों से अनुदान मांगते है। सरकार 37 पन्नों के अपने हलफनामे में कहा है कि इस बारे में लोगों से बड़े पैमाने पर शिकायत मिली है। सरकार ने मिशाल के तौर पर लोगों से मिली कुछ शिकायतें भी पेश किया है। दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की ओर से प्रबंधन कोटा समाप्त किए जाने के 6 जनवरी के अपने आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में यह हलफनामा दाखिल किया है। निजी स्कूलों ने कोटा समाप्त करने के सरकार के निर्णय को मनमाना और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए रद्द करने की मांग की थी। सरकार ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर हुई मैक्स फोर्ट स्कूल की जांच रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। सरकार ने कहा है कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि स्कूल ने चेक से अनुदान लिया और यह अनुदान प्रबंधन कोटा के तहत दाखिले के लिए लिया गया। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि स्कूलों को प्रबंधन कोटा क्यों और किसके लिए चाहिए। सरकार ने कहा है कि स्कूल प्रबंधन में सिर्फ 14 व्यक्ति होते हैं, ऐसे में उन्हें हर साल 20 फीसदी सीटें क्यों चाहिए। आखिर प्रबंधन से जुड़े लोगों के कितने बच्चे होंगे जो उन्हें हर साल इतनी सीटें चाहिए। जबकि सरकार ने स्टॉफ कोटा में प्रबंधन से जुड़े लोगों के बच्चों को दाखिले की छूट दे रखी है। सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि स्कूलों ने यह नहीं बताया है कि प्रबंधन कोटा में दाखिला किस तरह से होती है और इस सीट पर किसे दाखिला दिया जाएगा। सरकार ने स्कूलों की अपीलों को रद्द करने की मांग की है। दिल्ली सरकार ने अपने उस निर्णय को भी सही ठहराया है जिसमें दाखिले के लिए शाकाहारी, शराब नहीं पीने आदि जैसे 62 आधारों को रद्द कर दिया गया। सरकार ने कहा है कि इसके लिए लगभग स्कूलों द्वारा तय किए गए 2500 आधारों की समीक्षा के बाद जो बेहद आपत्तिजनक लगा उसे ही रद्द किया गया। हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के संघ एक्शन कमेटी और फॉरम फॉर क्वालिटी एजूकेशन फॉर ऑल की याचिका पर विचार करते हुए 18 जनवरी को सरकार को नोटिस जारी जवाब मांगा था। अब इस मामले में 28 जनवरी को सुनवाई होगी।