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नई दिल्ली: नाइजीरिया के 42 वर्षीय एक नागरिक को तस्करी कर दो किलो आठ सौ ग्राम हेरोइन भारत से बाहर भेजने का प्रयास करने के जुर्म में अदालत ने 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। पटियाला हाउस स्थित स्पेशल जज दीपक गर्ग की अदालत ने इस अपराध के लिए न्यूनतम सजा सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व निर्णय का हवाला दिया। जिसमें कहा गया था कि किसी अभियुक्त को सजा सुनाते समय उसे सुधरने का एक मौका दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि इस तथ्य के मद्देनजर कि अभियुक्त का कोई आपराधिक अतीत नहीं रहा है और उसके परिवार के सदस्य उस पर आश्रित हैं, इसलिए वह नरम रूख का हकदार है। अदालत ने यह पाया कि अभियुक्त का अतीत स्वच्छ रहा है। इसलिए उसे यह राहत दी जा रही है। हालांकि अदालत ने अभियुक्त पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पेश मामले में नाइजीरियन व्यक्ति को आठ जून 2011 को गिरफ्तार किया गया था। इस अभियुक्त पैट्रिक को एक गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ा गया था। तलाशी लेने पर उसके पास से दो किलो आठ सौ ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। सुनवाई के दौरान पैट्रिक ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इंकार किया और दावा किया कि उसे मामले में फंसाया गया है। परन्तु अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पैट्रिक को मादक पदार्थ की तस्करी का दोषी ठहराया है।

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