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देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने का असर आने वाले समय में अन्य राज्यों पर भी होगा और इसका मुकाबला लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और विकासवादी सोच रखने वाली सभी शक्तियों को एकजुट होकर करना होगा। यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए रावत ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के बाद उत्तराखंड की सरकार को बर्खास्त किया गया और आगे भी अन्य गैर भाजपा सरकारों पर यही खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री अपने ब्यानों में यह आशंका व्यक्त कर चुके हैं कि देश में कोई गैर भाजपा सरकार सुरक्षित नहीं है। इंदिरा हृदयेश, मंत्री प्रसाद नैथानी सहित अपने पूर्व मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम सबकी सामूहिक समझ है कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने से केवल प्रदेश पर ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों पर भी इसका आने वाले समय में इसका असर पड़ेगा।’ लोकतंत्र में सभी के विचार, वेशभूशा, रहनसहन अलग होने के बावजूद एक ताना-बाना होने की बात कहते हुए रवत ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों साथ-साथ चलती है लेकिन यहां असहिणुता का प्र्दशन हो रहा है।

सही सोच वाले लोगों को धमकाया जा रहा है और सहिष्णुता के नाम पर भारत में निरंकुशता थोपी जा रही है। रावत ने सवाल उठाया कि क्या अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए लोकतंत्र के अन्दर किसी भी राजनीतिक दल के विरुद्घ काम किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस मुक्त या विपक्ष मुक्त भारत बनाना है तो उसे जनता द्वारा चुनकर ही आना पड़ेगा और इसका कोई विकल्प नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस संबंध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सहित उत्तराखंड क्रांति दल, तथा समाजवादी पार्टी जैसे सभी लोकतात्रिंक मूल्यों में विश्वास रखने वालों लोगों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि ऐसी सभी शक्तियों को एकजुट होकर आगे के संघर्ष में साथ चलना होगा क्योंकि यह अब किसी एक राजनीतिक दल का मुदद नहीं रहा। उन्होंने कहा, ‘मैंने राज्य निर्माण की अवधारणा को सुनियोजित तरीके व एकजुटता से आगे बढ़ाया है।’ उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनकी सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा लिये गये निर्णयों को अधिकारियों द्वारा बदला जा रहा है जबकि निर्वाचित सरकार के निर्णयों को निर्वाचित सरकार ही बदल सकती है।

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