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देहरादून: उत्तराखंड में चार साल पुरानी कांग्रेस सरकार शुक्रवार रात संकट में घिर गई। उसके नौ विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए सरकार गठन का दावा पेश करने वाली भाजपा का समर्थन किया है। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और दिग्गज भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय समेत कई नेताओं ने इस मसले पर राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राज्यपाल से की रावत सरकार की बर्खास्तगी की मांग पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में भाजपा का एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल केके पॉल से मिला और कहा कि हरीश रावत सरकार अल्पमत में आ गई है और इसे बर्खास्त किया जाए। प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड मामलों के भाजपा प्रभारी श्याम जाजू और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल थे। राजभवन के सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने कांग्रेस के बागी विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया है। बहुगुणा और रावत ने मिलाया भाजपा के सुर में सुर सत्तर-सदस्यीय राज्य विधानसभा में कांग्रेस के अभी 36 विधायक हैं, लेकिन अब पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के साथ सात अन्य कांग्रेस सदस्यों ने विपक्षी दल भाजपा के साथ सुर में सुर मिलाते हुए बजट पारित कराने के लिये मत विभाजन की मांग करते हुए उनके साथ सदन में धरना दिया।

हालांकि, अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने सदस्यों की मत विभाजन की मांग को अस्वीकार कर दिया और ध्वनिमत से बजट के पारित होने की घोषणा करते हुए सदन की कार्यवाही 28 मार्च तक के लिये स्थगित कर दी। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट और हरक सिंह रावत ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और उन्हें हरीश रावत सरकार के अल्पमत में आने की जानकारी देंगे। इससे पहले विभागवार बजट मांगों के पारित हो जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री इंदिरा ह्रदयेश ने जैसे ही बजट विधेयक पारित कराने के लिये सदन से अनुमति मांगी, विपक्ष के नेता भट्ट की अगुवाई में सभी भाजपा नेता अपने स्थानों पर खड़े हो गये और अध्यक्ष कुंजवाल से उस पर मत विभाजन की मांग करने लगे।

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