देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के घंटो बाद ही हरीश रावत ने एक कैबिनेट बैठक बुलाई जिसमें '11 फैसले' लिए गए हैं। रावत ने कहा है कि इन फैसलों को तेज़ी से अमल में लाया जाएगा और इस वक्त उनके प्रशासन की प्राथमिकता राज्य को पानी संकट से बाहर निकलाने की है। गुरुवार को सीएम हरीश रावत की अध्यक्षता में बीजापुर कैंप में रात नौ बजे से कैबिनेट बैठक शुरू हुई। लगभग ढाई घंटे की बैठक में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि जमीनों के सर्किट रेट कम करने के लिए कमेटी बना दी है। कमेटी में वित्त मंत्री के अलावा मुख्य सचिव, वित्त सचिव व सभी जिलाधिकारी सदस्य होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के बर्खास्त विधायक विजय बहुगुणा ने भी पूर्व में इस मांग को उठाया था। सरकार ने सभी गेस्ट टीचरों को दोबारा नौकरी देने के लिए शुक्रवार को जीओ करने पर सहमति दे दी है। रिस्पना पुल तिराहे को अब शक्तिमान घोड़े के नाम से जाना जाएगा। भाजपा के 14 मार्च की रैली के दौरान शक्तिमान घायल हो गया था। एक दिन पहले ही इलाज के दौरान शक्तिमान ने दम तोड़ दिया था। भाजपा विधायक गणेश जोशी व अन्य भाजपाइयों के खिलाफ इस मामले में मुकदमा दर्ज किया था।
कैबिनेट के फैसले
समाज कल्याण की सभी पेंशन में दो सौ रुपये का इजाफा राजकीय महाविद्यालयों में दो शिफ्टों में कक्षाएं चलेंगी।
राठ महाविद्यालय पैठाणी (पौड़ी) और लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय (लालकुआं) के कर्मचारी व असिस्टेंट प्रोफेसरों का राजकीयकरण होगा।
पेयजल सुधार को हर जिले को पांच-पांच करोड़, प्रभारी मंत्री के अध्यक्षता में अनुश्रवण कमेटी बनेगी।
मलिन बस्तियों को मिलेगा मालिकाना हक
देहरादून के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को अपने स्तर से संवारेगी सरकार
हल्द्वानी में गोला पार अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कांपलेक्स परियोजना को वित्तीय मंजूरी
उच्च शिक्षा में 92 विजिटिंग प्रवक्ता संविदा पर रखने की मंजूरी
चकबंदी विधेयक का आर्डनेंस लाया जाएगा।
गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को यह साफ कर दिया था कि रावत को उनकी कुर्सी से केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति शासन के बेजा इस्तेमाल के द्वारा हटाया गया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार यह बताना चाह रही है कि इस राज्य को गर्वनर के के पॉल के साथ मिलकर वह संभाल सकते हैं। उत्तराखंड कोर्ट के जजों की टिप्पणी और इस फैसले ने केंद्र को काफी संकट की स्थिति में डाल दिया। हालांकि इस फैसले के खिलाफ केंद्र ने यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन जरूरी है क्योंकि रावत ने विधानसभा में बहुमत गंवा दिया है और अब उनकी सरकार अल्पमत में हैं। केंद्र सरकार का आरोप है कि पिछले महीने मुख्यमंत्री ने जो बजट पेश किया था उसके खिलाफ 9 कांग्रेस विधायकों ने वोट किया था। बीजेपी का कहना है कि इसके बावजूद बजट को पास कर दिया गया जबकि ज्यादातर विधायकों का वोट बजट के विरोध में था। हालांकि इस तर्क से रावत और कांग्रेस सहमत नहीं हैं। अब 29 अप्रैल को उन्हें विश्वास मत हासिल करना होगा। रावत के लिए यह मत हासिल करना तब आसान हो जाएगा अगर कांग्रेस के उन नौ बाग़ी विधायकों को कोर्ट अयोग्य करार कर देती है। अगर उन्होंने हिस्सा नहीं लिया तो रावत के लिए कम वोट में भी काम बन सकता है।