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नई दिल्ली: केंद्र ने आज (गुरूवार) सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह संवेदनशील सतलुज-यमुना लिंक नहर मामले में 2004 के अपने रूख पर कायम है और चाहता है कि पंजाब और हरियाणा को अपने विवादों का खुद से समाधान करना चाहिए। सॉलीसीटर जनरल रंजीत कुमार ने न्यायमूर्ति ए.आर. दवे की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा, ‘2004 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल ने केंद्र सरकार की तरफ से कहा था कि वह कोई बयान देना नहीं चाहते और न ही वह कोई हलफनामा दायर करने के इच्छुक हैं। हम संदर्भ पर वही रख कायम रख रहे हैं और चाहते हैं कि राज्यों को खुद से अपने विवाद का समाधान करना चाहिए।’ पीठ में न्यायमूर्ति पीसी घोष, न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह, न्यायमूर्ति एके गोयल, न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय भी हैं। पीठ एसवाईएल विवाद पर राष्ट्रपति द्वारा शीर्ष अदालत से मांगी गई राय पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने मुद्दे पर अपना फैसला टाल दिया और पक्षकारों से कहा कि वो सात दिन में लिखित दलील दायर करें। सॉलीसीटर जनरल ने कहा कि अगर पंजाब ने समझौते को समाप्त कर दिया है तो इसका मतलब साफ है कि वह दूसरे राज्यों को पानी नहीं देना चाहता है।

इसपर पीठ ने कहा कि पंजाब की दलील है कि जब तक इसका निर्धारण नहीं हो जाता तब तक वो मौजूदा व्यवस्था जारी रखेगा। केंद्र ने पिछली कुछ सुनवाइयों में यह भी कहा था कि वह किसी का पक्ष नहीं ले रहा है और निष्पक्ष रख पर कायम हैं। जब सुनवाई चल रही थी तभी पंजाब विधानसभा ने एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए अपनी तरफ से अधिग्रहण की गई जमीन को लौटाने पर एक कानून पारित किया था। हरियाणा सरकार ने इसके बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष अदालत ने यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया था। उसने केंद्रीय गृह सचिव और पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भूमि और एसवाईएल नहर के लिए अन्य संपत्ति का संयुक्त रिसीवर नियुक्त किया गया था।

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