सूरत: गुजरात विधानसभा के चुनावी मैदान में शनिवार को कांग्रेस का प्रचार करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी उतरे। उन्होंने सूरत में पेशेवरों और कारोबारियों को संबोधित करते हुए कहा, वित्तवर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में जीडीपी दर में वृद्धि को नोटबंदी और जीएसटी के नकारात्मक असर खत्म होने के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
डॉ.सिंह ने कहा, यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि अर्थव्यवस्था में गिरावट का रुख खत्म हो गया है, जो पिछली पांच तिमाहियों से देखा जा रहा था। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सीएसओ (केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय) के आंकड़ों में अनौपचारिक क्षेत्र पर जीएसटी और नोटबंदी के असर का सही आकलन नहीं हुआ है। जबकि अनौपचारिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री गोविंद राव के हवाले से कहा, इसमें छोटे और मझौले क्षेत्र की गणना नहीं की जाती है, जो नोटबंदी और जीएसटी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। अभी भी बड़ी समस्याएं बरकरार हैं। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर गिरकर 1.7 फीसदी हो चुकी है, जो पिछली तिमाही में 2.3 फीसदी थी। जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 4.1 फीसदी थी।
डॉ. सिंह ने भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, अर्थव्यवस्था पर नोटंबदी के असर से सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 2017-18 की पहली तिमाही में नई गणना के तहत 5.7 फीसदी पर आ गई। जो दूसरी तिमाही में 6.3 % के स्तर पर पहुंच गया है।
उन्होंने कहा, जीडीपी वृद्धि में एक फीसदी की गिरावट की अभिप्राय देश को 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान है। इस गिरावट का देशवासियों के ऊपर पड़े असर के बारे में सोचें। उनकी नौकरियां खो गईं और नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर खत्म हो गए। व्यवसायों को बंद करना पड़ा। जो उद्यमी सफलता की राह पर थे, उन्हें निराशा हाथ लगी है।
सरकारी खर्च के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट इस तथ्य के बावजूद आई है कि सरकार अपनी परियोजनाओं पर खूब खर्च कर रही है। यहां तक कि इसके कारण राजकोषीय घाटा पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का महज सात महीनों में ही 96.1 पर्सेंट तक जा पहुंचा है। इसका सीधा मतलब है कि निजी क्षेत्र ने इस क्षेत्र पर न्यूनतम खर्च किया है।
एनडीए का औसत विकास दर 7.1 %
डॉ. सिंह ने कहा, आरबीआई के अनुमान के मुताबिक इस वित्त वर्ष में विकास दर 6.7 फीसदी रहेगी। अगर ऐसा होता है तो भी एनडीए के चार साल के कार्यकाल की औसत विकास दर केवल 7.1 फीसदी ही रहेगी। लेकिन मुझे इसकी उम्मीद भी नहीं है।
यूपीए कही आगे
उन्होंने कहा, यूपीए के 10 साल के औसत में अर्थव्यवस्था की रफ्तार पांचवें साल में बढ़कर 10.6 फीसदी तक आ गई थी।