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(आशु सक्सेना): समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यूपी चुनाव 2027 से पहले अपने पिता मुलायम सिंह यादव का 40 साल पुराना इतिहास दोहरा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में रथ यात्रा निकालेंगे। यह रथ यात्रा सितंबर 2026 में निकाली जा सकती है। बता दें कि साल 1987 में लोकदल (ब) के प्रदेश अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में क्रांति रथ निकाला था। मुलायम सिंह यादव ने जन संपर्क के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया था।

क्रांति रथ की लिफ्ट से मुलायम सिंह यादव जब रथ की छत पर आते थे, तब छोटे कद के मुलायम सिंह यादव वहां मौजूद जनसमूह के आकर्षण का केंद्र होते थे। रथ की छत से मुलायम नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते थे। इस रथ यात्रा के दौरान ही बुलंदशहर में मुलायम सिंह यादव से मेरी पहली मुलाकात हुई थी। उन दिनों में 'अमर उजाला' के जिला संवाददाता के तौर पर बुलंदशहर में तैनात था। निश्चित रूप से उस वक्त जन संपर्क के लिहाज से मुलायम सिंह की क्रांति रथ यात्रा काफी सफल रही थी।

(आशु सक्सेना): कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत देना मोदी सरकार के लिए अब सिरदर्द बनता नज़र आ रहा है। सीजेपी के बैनरतले हो रहे इस प्रदर्शन को लेकर लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की 'भूख हड़ताल' सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दरअसल मुख्य मंच सीजेपी के अधिकार क्षेत्र में है। जहां सोनम वांगचुक की 18 दिन से भूख हड़ताल चल रही है।

वामपंथी छात्र संगठनों ने भी प्रदर्शन स्थल पर डेरा डाला

वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन स्थल पर कई सामाजिक संगठनों और वामपंथी छात्र संगठनों ने भी टैंट लगाकर डेरा डाल दिया है। इन टेंटों में कई छात्र भूख हड़ताल पर चल रहे हैं। भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच प्रदर्शन स्थल पर पूरे दिन सरकार विरोधी नारों की गूंज सुनाई देती है। प्रदर्शन स्थल पर चारों तरफ सरकार विरोधी नारों के पोस्टर नज़र आते हैं। सुरक्षा घेरे से गुजर कर भारी तादाद में युवा अपना समर्थन व्यक्त करने प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे हैं। सोनम वांगचुक की मांगों को राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है।

(आशु सक्सेना): पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव 2029 से पहले प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के आंकलन की सही तस्वीर सामने आ जाएगी। पश्चिम बंगाल से विपक्षी राजनीतिक दल टीएमसी को सत्ता से बेदखल करने के बाद पीएम मोदी के लिए उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार को बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

पीएम मोदी अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सत्ता बरकरार रखने में सफल रहे, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उनके सामने कोई चुनौती नहीं होगी।

लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और झारखंड़ को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में पीएम मोदी डबल इंजन की सरकार चला रहे हैं और इन सभी राज्यों के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी ने अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रखा है। इन राज्यों में बीजेपी का सीधा मुकाबला कांग्रेस से था। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को रोकने में नाकामयाब रही थी। लेकिन यूपी में पीएम मोदी को समाजवादी पार्टी ने जबरदस्त टक्कर दी थी। 

(पुष्प रंजन): 9 नवम्बर 2016 को आपदा प्रबंधन पर प्रधानमंत्री का 10 सूत्रीय एजेंडा जारी किया गया था। उन दस सूत्रों में दो अहम् थे- पहला आपदा प्रबंधन की दक्षता को बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का फायदा उठाया जाए। दूसरा, किसी भी आपदा से सीखने का मौका नहीं गंवाना चाहिए। तेलंगाना के श्रीसैलम में निर्माणाधीन सुरंग की छत का हिस्सा ढहने के बाद जो कुछ हुआ, क्या उससे देश के प्रधानमंत्री वाकिफ हैं? क्या उन्हें सेठ जी के प्राइवेट पशुशाला का उद्घाटन करने, व्याघ्र शावकों से खेलने, उन्हें दूध पिलाने और उत्तरखंड में मंदिर दर्शन करना ज़्यादा ज़रूरी लगता है? 13 दिन हो गए इस हादसे के, सारे प्रयास और उपलब्ध तकनीक विफल साबित हुए।

तेलंगाना के श्रीसैलम सुरंग में जिन लोगों के मारे जाने की आशंका है, उनकी पहचान रॉबिंस टनल बोरिंग मशीन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के सनी सिंह और गुरप्रीत सिंह तथा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के मनोज कुमार, श्रीनिवास, संदीप साहू, संतोष साहू, अनुज साहू और जगत खेस के रूप में हुई है। चार साल पहले रिपोर्ट आई थी कि यह जगह सुरंग खोदने के योग्य नहीं है। उसे अनदेखा कर, सुरंग की ड्रिलिंग शुरू हुई।

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