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नई दिल्ली: दिल्ली की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। आज सोमवार को समूची दिल्ली ट्रैफिक में फसी हुई थी। पुलिस वाले इस व्यवस्था को संभालने के लिए बसों को मन चाहे रास्तों पर जाने के लिए कह रहे थे। सवाल यह है कि बस में सवार लोग आखिर अपने गंतव्य तक कैसे पहुंचेंगे, क्या बस में सफर करने वाला व्यक्ति इंसान नही है, जो बस में सवार होते वक्त अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस मे सवार हुई थी। जी मैं उस हकीकत को आपके सामने रख रहा हूॅं, जिससे आप हर दिन दिल्ली में रूबरू होते है। दिल्ली पुलिस जब ट्रैफिक को व्यवस्थित करने का प्रयास करती है, तब डाईबर्जन के नाम पर बसों को कहीं भी मोड देते हैं, जबकि कार अपने रास्ते पर चलती रहतीं हैं। अब सवाल यह है कि कार में बैठा अकेला व्यक्ति और बस मे सवार सौ लोगों में किस की सुविधा तलाश रही है यह दिल्ली पुलिस ?

क्या डाईबर्जन के नाम पर कारों को नया रास्ता नही बताया जा सकता। कार पर सवार व्यक्ति को थोड़ा घुम फिर कर अपने गंतव्य तक पहुंचने में ज्यादा दिक्कत नही होगी। लेकिन दिल्ली पुलिस आम आदमी की दिक्कतों में इजाफा करते हुए फिलहाल बसों को ही भटकाने में व्यस्त है।

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