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इंदौर: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के परिसर में एक आयोजन के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारेबाजी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि इस तरह के नारे लगाने वाले तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिये। सिंह ने यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘देश के लिये दुर्भाग्य का विषय है कि जेएनयू परिसर में आतंकवादियों को महिमांडित करने के लिये उनके समर्थन में पिछले दिनों नारे लगाये गये। इस विश्वविद्यालय में ऐसे भारतविरोधी विचारों का पनपना कतई उचित नहीं है।’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘जेएनयू परिसर में देश को विभाजित करने की बातें करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिये।’

सिंह ने एक सवाल पर उम्मीद जतायी कि रायपुर और छत्तीसगढ़ के अन्य प्रमुख शहर केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत चुने जाने वाले शहरों की अगली सूची में जगह बनाने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा, ‘छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के नगर निगम स्मार्ट सिटी परियोजना के मापदंडों के मुताबिक अपनी व्यवस्थाओं को सुधार रहे हैं।’ इससे पहले, सिंह ने इंदौर प्रेस क्लब के ‘छोटे राज्यों की जटिलताएं और संभावनाएं’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कार्यक्रम में कहा, ‘वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश के विभाजन से छत्तीसगढ़ का जन्म कई चुनौतियों के बीच हुआ था। लेकिन इस विभाजन से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को फायदा हुआ और आज दोनों सूबे विकास की राह पर हैं।’ उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छत्तीसढ़ के लोगों की गहरी आस्था के कारण सूबे में नक्सलियों का प्रभाव कम हो रहा है।सिंह ने कहा, ‘नक्सलियों की जान से मार डालने की धमकी से बेपरवाह होकर बस्तर क्षेत्र के लोग लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 70 प्रतिशत से ज्यादा मतदान करते हैं।’

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