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नई दिल्ली: कच्चे तेल की की ऊंची कीमतों और घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी के बीच रुपया मंगलवार को तीन पैसे की गिरावट के साथ 95.40 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी घरेलू मुद्रा पर दबाव पड़ा, लेकिन हाल ही में विदेशी कोषों के प्रवाह ने रुपये को कुछ हद तक समर्थन दिया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.35 प्रति डॉलर पर खुला। यह 95.25 से 95.42 के दायरे में कारोबार करता रहा। अंत में यह 95.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की गिरावट है। रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.37 पर बंद हुआ था।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से वैश्विक जोखिम संबंधी धारणाओं में सुधार के चलते रुपये में मामूली सकारात्मक रुझान की उम्मीद है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल रुपये पर उच्च स्तर का दबाव डाल सकते हैं।’’

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमेटी (आरबीआई-एमपीसी) बुधवार को आने वाले निर्णय में ब्याज दरों को यथावत रख सकती है। इसकी वजह महंगाई का निर्धारित लक्ष्य के नीचे होना और आर्थिक विकास पर फोकस होना है। यह जानकारी मंगलवार को एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।

मौजूदा समय में देश में खुदरा महंगाई की दर आरबीआई द्वारा तय सीमा 2-6 प्रतिशत के बीच है और केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में कीमतों में स्थिरता के साथ विकास सुनिश्चित करने के लिए इस रेंज के बीच के 4 प्रतिशत के स्तर को अपना लक्ष्य मानता है।

जून में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.38 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसकी मुख्य वजह वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कुछ आयातित चीजों का महंगा होना था। सरकारी तेल कंपनियों ने ग्राहकों को बचाने के लिए कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का ज्यादातर बोझ खुद उठाया है।

मुंबई: वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के चलते हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस तरह लगातार चार सत्रों से जारी बढ़त का सिलसिल थम गया। इस दौरान, रियल एस्टेट, एफएमसीजी और आईटी शेयरों में कमजोरी के कारण प्रमुख बेंचमार्क नीचे गिर गए, जबकि मेटल शेयरों ने व्यापक रुझान के विपरीत रुख अपनाया। फॉर एंड ओनर्स एक्सपायरी को लेकर बाजार में अस्थिरता बनी रही। वहीं, बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले से पहले निवेशक सतर्क नजर आए।

एनएसई निफ्टी50 159 अंक यानी 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ, तो वहीं बीएसई सेंसेक्स 210.08 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,428.95 पर बंद हुआ। इस बीच, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन मिलाजुला रहा, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने इस प्रवृत्ति को उलटते हुए 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।

नई दिल्ली: सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (एलईसी) में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस घोषणा का असर मंगलवार को शेयर बाजार में तुरंत देखने को मिला और कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में 7% से ज्यादा टूट गया। दोपहर तक शेयर करीब 8% की गिरावट के साथ 393.40 रुपये पर पहुंच गया, जबकि कारोबार के दौरान यह 390.50 रुपये के निचले स्तर तक फिसल गया। सरकार यह हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए बेचेगी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सचेंज में दी गई जानकारी के अनुसार भारत सरकार ओएफएस के जरिए एलईसी में 6.5% तक हिस्सेदारी बेचेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनी में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) से जुड़े नियामकीय नियमों को पूरा करना है। देश के बाजार नियामक ने एलईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने की मंजूरी दी है। यदि यह ऑफर पूरी तरह सफल रहता है तो कंपनी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग मौजूदा 3.5% से बढ़कर 10% हो जाएगी।

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