लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की से दरिंदगी और मौत के मामले में शुक्रवार को सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर दी। चार्जशीट में चारों आरोपियों पर सीबीआई ने गैंगरेप और हत्या का आरोप लगाया। सीबीआई की चार्जशीट ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। सपा और कांग्रेस ने योगी सरकार पर हमला बोला है। यूपी के प्रमुख दल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार से बिना लड़े कुछ भी नहीं मिलता न इंसाफ़, न हक़। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि ध्यान भटकाने की साजिश किसकी थी?
उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को हाथरस में दलित लड़की के साथ कुछ युवकों ने दरिंदगी की थी। गंभीर हालत में लड़की को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई। मौत के बाद पुलिस ने रात में ही पीड़ित का शव गांव ले जाकर परिवार की गैरमौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया था। इसे लेकर कई दिनों तक हंगामा चला। हाथरस में धरना प्रदर्शन हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटना की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
सीबीआई ने शुक्रवार को चारों आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप की धाराओं में चार्जशीट दायर की।
इसी को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि ‘हाथरस कांड’ में उप्र की भाजपा सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी जनता, विपक्ष व सच्चे मीडिया के दबाव से सीबीआई जांच बैठानी ही पड़ी। अब पीड़िता के अंतिम बयान के आधार पर चारों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल हुई है। भाजपा सरकार से बिना लड़े कुछ भी नहीं मिलता न इंसाफ़, न हक़।
वहीं कांग्रेस ने भी योगी सरकार पर हमला किया। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने हाथरस कांड पर चार्जशीट दायर होने के बाद लिखा कि एक तरफ सरकार सरंक्षित अन्याय था। दूसरी तरफ परिवार की न्याय की आस थी। पीड़िता का शव जबरदस्ती जला दिया गया। पीड़िता को बदनाम करने की कोशिशें हुईं। परिवार को धमकाया गया। लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई। सत्यमेव जयते।
कांग्रेस ने कहा कि योगी जी को एक प्रेस कांफ्रेंस करके ये बताना चाहिए कि हाथसर केस से ध्यान भटकाने के लिए "इंटरनेशनल साज़िश" वाली साज़िश किसकी थी? आखिर क्यों हाथरस केस में योगी सरकार ने पीड़िता के परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया?
घटना के बाद खूब हुई थी राजनीति
घटना के बाद से ही मामले को लेकर दो पक्ष बन गए थे। जमकर राजनीति भी हुई थी। एक पक्ष लड़की के परिवार वालों पर ही उंगली भी उठा रहा था। सीबीआई ने भी लड़की के परिवार वालों से कई दौर की पूछताछ की थी। घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने का दावा करने वाले चश्मदीद छोटू से भी कई बार पूछताछ की गई। सीन री-क्रिएशन के साथ घटनास्थल का नक्शा भी बनाया गया। सीबीआई ने पीड़िता के आखिरी बयान को चार्जशीट का आधार बनाया और चारों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 325-एससी/एसटी एक्ट, 302, 354, 376 A और 376 D के तहत चार्जशीट फाइल की।