ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

नई दिल्ली/हल्द्वानी: हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। पूर्व में यह सुनवाई दो दिसंबर को होनी थी लेकिन समयाभाव के कारण इसे टालते हुए 10 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की गई थी।

16 दिसंबर मिली अगली तारीख

यह मामला सीधे 4365 मकानों में रह रही बड़ी आबादी से जुड़ा है। बीते साल अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस और जिला प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। संभावित फैसले से पहले प्रशासन ने क्षेत्र की संवेदनशीलता और तनाव की आशंका को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया था। दरअसल रेलवे भूमि से जुड़ी इस याचिका के फैसले का असर ना सिर्फ हल्द्वानी बल्कि पूरे देश में देखने को मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है।

नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र से जुड़े रेलवे भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को अपना महत्वपूर्ण और अंतिम फैसला सुनाने जा रहा है। लगभग 29 एकड़ रेलवे भूमि पर वर्षों से चल रहे कब्जे को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया अब खत्म होने की कगार पर है। यह फैसला हजारों स्थानीय परिवारों के भविष्य के साथ-साथ देशभर में रेलवे भूमि प्रबंधन के मामलों के लिए भी एक अहम मिसाल साबित हो सकता है।

इस आदेश का प्रभाव सिर्फ हल्द्वानी तक सीमित नहीं रहेगा। इसलिए पूरे देश का ध्यान इस मामले पर है। फैसला तय करेगा कि रेलवे संपत्ति पर कब्जे के मामलों में आगे क्या प्रक्रिया और मानक अपनाए जाएंगे। फैसले से पहले नैनीताल जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आरपीएफ, रेलवे पुलिस, पीएसी, पैरामिलिट्री फोर्स और उत्तराखंड पुलिस बड़ी संख्या में तैनात की गई है। अधिकारियों के मुताबिक बल को एलएमजी सहित आधुनिक हथियारों से लैस किया गया है, ताकि किसी भी हालात में कानून-व्यवस्था नियंत्रण से बाहर न हो।

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (9 नवंबर) को कहा कि देवभूमि उत्तराखंड, भारत के आध्यात्मिक जीवन की धड़कन है। उन्होंने केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे तीर्थों को विश्वास और आस्था का प्रतीक बताया। पीएम मोदी उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष से जुड़े समारोह में शामिल हुए।

उत्तराखंड की स्थापना के 25 साल पूरे हो गए हैं। पीएम मोदी ने उत्तराखंड के विकास को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि अब राज्य का बजट कई गुना ज्यादा बढ़ गया है। अहम बात यह भी है कि पीएम ने इस दौरान संबोधन की शुरुआत गढ़वाली बोली से की।

'स्पिरिचुअल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड बनेगा उत्तराखंड': पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''देश ने आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है और इसका रास्ता वोकल फॉर लोकल से तय होगा। उत्तराखंड इस विजन को हमेशा से जीता आया है। स्थानीय उत्पादों से लगाव, उनका उपयोग, और उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बना लेना यहां की परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।''

नई दिल्ली: उत्तराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं?

दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिनका नाम दो या ज़्यादा जगह वोटर लिस्ट में शामिल था। आयोग का यह फैसला उत्तराखंड हाकोर्ट के आदेश के खिलाफ था। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को वैधानिक प्रावधान मानने के लिए कहा था, लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया। राज्य चुनाव आयोग ने एक सर्कुलर जारी कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों के नाम कई मतदाता सूचियों में दर्ज हैं, वे पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने आयोग के उस सर्कुलर पर रोक लगा दी थी। राज्य चुनाव आयोग ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख