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नई दिल्ली: नोएडा के अरबपति इंजीनियर यादव सिंह को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में गाजियाबाद में गिरफ्तार किया है। यादव सिंह पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है। यादव सिंह उत्तर प्रदेश का पैसा बनाने वाला सबसे बड़ी सरकारी मशीन कहा जाता है। जब उसके ठिकाने पर इनकम टैक्स विभाग का छापा पड़ा तो वहां उसके पास अरबों रुपये के बंगले, गाड़ियां, शेयर, जेवराज, जमीन और कंपनियों का पता चला था। यादव सिंह पर आरोप है कि इसने यूपी के सबसे अमीर विभाग नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहते हुए कई सौ करोड़ रुपये घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी के इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन बड़ी भूमिका होती थी।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद के 31 प्रत्याशियों की सूची मंगलवार को जारी कर दी। प्रत्याशियों को तय करने में युवाओं पर भरोसा जताया है। साथ ही मंत्रियों व विधायकों के नाते-रिश्तेदारों को भी तवज्जो दी है। खास बात यह है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व सीएम अखिलेश यादव के काफी निकट माने जाने वाले दो युवा नेता आनंद भदौरिया व सुनील सिंह साजन को भी टिकट मिल गया है। यही नहीं पूर्व अधिकारी के रूप में माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक रह चुके वासुदेव यादव भी प्रत्याशी बनाए गए हैं। चर्चा है कि एक और अधिकारी को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने मंगलवार को 31 प्रत्याशियों की सूची जारी की दी है।

कानपुर: प्रदेश के नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खान ने अमर सिंह पर फिर तल्ख टिप्पणी की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमर सिंह दगे हुए कारतूस हैं। सपा में उनकी वापसी संभव नहीं है। वह पार्टी में वापसी का ख्वाब देख रहे हैं। उनके लिए दल में कोई जगह नहीं है। सोमवार की देर शाम एनआरआई सिटी में आयोजित एक वैवाहिक समारोह में हिस्सा लेने आए आजम खान ने कहा कि बिहार चुनाव में भाजपा करारी हार के चलते खुन्नस में है। यूपी और बिहार से केन्द्र सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। इसी के चलते कानपुर और लखनऊ समेत प्रदेश के किसी सिटी को स्मार्ट सिटी घोषित नहीं किया। सपा नेता ने कहा कि कानपुर और लखनऊ तो पहले से ही स्मार्ट शहर हैं।

बनारस: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आंखों का इलाज कराने आए कुछ मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का मामला सामने आया है। पांच मरीजों ने पुलिस में मामला दर्ज कराकर दोषी डॉक्टर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है। मरीजों का कहना है कि 28 जनवरी को आंखों का इलाज करने वाले डॉक्टर ओपीएस मौर्या ने उन्हें एक इंजेक्शन दिया, जिससे सुबह होते-होते उन्हें दिखना बंद हो गया। जब वे अपनी समस्या लेकर दोबारा डॉक्टर के पास गए तो तरह-तरह के आश्वासन देकर टालमटोल किया जाने लगा। बाद में पीड़ितों ने बीएचयू गेट के पास लंका थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है।

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