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(आशु सक्सेना): पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव 2029 से पहले प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के आंकलन की सही तस्वीर सामने आ जाएगी। पश्चिम बंगाल से विपक्षी राजनीतिक दल टीएमसी को सत्ता से बेदखल करने के बाद पीएम मोदी के लिए उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार को बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

पीएम मोदी अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सत्ता बरकरार रखने में सफल रहे, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उनके सामने कोई चुनौती नहीं होगी।

लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और झारखंड़ को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में पीएम मोदी डबल इंजन की सरकार चला रहे हैं और इन सभी राज्यों के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी ने अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रखा है। इन राज्यों में बीजेपी का सीधा मुकाबला कांग्रेस से था। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को रोकने में नाकामयाब रही थी। लेकिन यूपी में पीएम मोदी को समाजवादी पार्टी ने जबरदस्त टक्कर दी थी। 

विकास योजनाओं की दिशा अब उत्तर प्रदेश पर केंद्रीत होगी

यहीं वजह ​है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में चुनाव तैयारियों की कवायद तेज कर दिया है। रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने (बीजेपी) के पार्टी संगठन में भी फेरबदल की सुगबुगाहट भी शुरू कर हो गई है। जल्द ही संगठन में प्रभावित नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही देश की विकास योजनाओं की दिशा भी अब जल्द ही उत्तर प्रदेश पर केंद्रीत हो जाएगी। विकास योजनाओं के सरकारी कार्यक्रमों में पीएम मोदी चुनावी भाषण देकर जनता को आकर्षित करने की कोशिश जारी रखेंगे। पिछले 12 सालों से देश का 'योजनाबद्ध विकास चुनावी विकास में तब्दील' हो चुका है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने पहला प्रशासनिक फैसला 'योजना आयोग' को 'नीति आयोग' में तब्दील करने का किया था।

बीजेपी नीत एनडीए यूपी में तीन क्षेत्रीय दल शामिल है

उत्तर प्रदेश में एनडीए में बीजेपी के संग अपना दल के अलावा कुल तीन क्षेत्रीय दल शामिल हैं। दस महीने बाद बीजेपी को इस सूबे के चुनावों का सामना करना होगा। इस सूबे में बीजेपी नीत डबल इंजन सरकार की लगातार तीसरी वापसी के लिए एनडीए घटक दलों के साथ चुनावी तालमेल कायम रखना बीजेपी आलाकमान के सामने बड़ी चुनौती है। 403 सदस्यों वाली विधानसभा वाले प्रदेश में सहयोगी दलों को संतुष्ट किए बगैर सत्ता पर काबिज रहने की राह आसान नहीं होगी।

विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ती है बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) देश हर प्रदेश का विधान सभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर लड़ती है। पार्टी के स्टार प्रचार पीएम मोदी भी विधानसभा चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झौंक देते हैं। हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पीएम मोदी दक्षिण के दोनों राज्यों समेत हर प्रदेश में कई कई चुनावी रैलियों को संबोधित किया। हालांकि दक्षिण में उनके चुनाव प्रचार का कोई विशेष असर देखने को नही मिला। लेकिन बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड़ बहुमत हासिल करते हुए विपक्षी क्षेत्रीय पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 15 साल बाद सत्ता से बाहर कर दिया है। वहीं असम और केंद्र शासित पुंडुचेरी विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। लोकसभा चुनाव नतीजों को देखते हुए अयोध्या, काशी और मथुरा वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जीत दर्ज करना पीएम मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। 

लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर थे  पीएम मोदी

लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी वाले प्रदेश में सत्ता बरकरार रखने की बहुत बड़ी चुनौती है। यह वही प्रदेश है, जहां के मतदाताओं ने बीजेपी को अपने बूते पर पूर्ण बहुमत हासिल करने से रोक दिया था। लोकसभा चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर पर आ गई है। यही नहीं वाराणसी में पीएम मोदी की जीत का अंतर घट कर मात्र एक लाख 51 हजार 513 रह गया। दिलचस्पी की बात यह है कि विधानसभा चुनावों के प्रचार में आम तौर पर पीएम मोदी को रोड़ शो करते हुए देखा जा सकता है। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी ने कोई रोड़ शो नहीं किया था। जबकि इससे पहले वाले चुनाव में पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार का अंत रोड़ शो के साथ किया था।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सूबे में प्रमुख विपक्ष समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव में सपा की हार हुई थी। लेकिन चुनाव उनके विधायकों की संख्या 111 तक पहुंच गई थी। अखिलेश ने लोकसभा चुनाव पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक गोलबंदी के नारे पर लड़े थे। मतदाताओं ने पीएम मोदी के 400 पार के नारे के खिलाफ मतदान किया और बीजेपी को 31 सांसदों तक सीमित कर दिया। लिहाजा विधानसभा में पीएम मोदी को जादू लौटेगा यह तो चुनाव नतीजों के बाद तय होगा। लेकिन फिलहाल यह तय है कि उत्तर प्रदेश चुनाव निश्चित ही 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमी फाइनल होगा। क्योंकि पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर लोकसभा चुनाव तक ज्यादातर राज्यों में पीएम मोदी की डबल इंजन सरकार सत्ता पर काबिज हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों का ट्रेंड हो जाएगा तय 

देखने की बात यह होगी कि हाल ही में संपन्न राज्यों के चुनाव में जो रूख मतदाताओं का नज़र आया है, उसमें ज्यादातर राज्यों में सत्ता विरोधी लहर नज़र आयी। तीन राज्यों में मतदाताओं ने सत्तारूढ़ दल को सबक सिखाया है। लेकिन बीजेपी शासित प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर कोई असर नज़र नहीं आया। इसके उलट इन राज्यों में बीजेपी ने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया है।

लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में लगातार ऐसा ही ट्रेंड साफ नज़र आया है। एनसीआर के बाद हो रहे विधानसभा चुनावों की कड़ी में बिहार और बंगाल के बाद देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश भी जुड़ जाएगा। देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनाव आयोग भी उत्तर प्रदेश को लेकर सतर्क हो गया होगा। क्योंकि एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पर सवालिया निशान लग गया है। बंगाल चुनाव में लाखों मतदाताओं को न्याय दिलाने में सुप्रीम कोर्ट असफल रहा है। विचाराधीन मतदाताओं की संख्या बंगाल चुनाव जीते हुए मतदाताओं से ज्यादा है। लिहाजा यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर चुनाव आयोग से जबाव तलब करेगा। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर एक याचिका लंबे समय से लंबित है। वहीं विधानसभा चुनावों में हेराफेरी की याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

 विपक्ष बीजेपी की जीत को 'वोट चोरी' बता रहा है

विधानसभा चुनाव में हेराफेरी को लेकर राजनीतिक माहौल बंगाल चुनाव के बाद काफी गरम हो गया है। टीएमसी प्रमुख ममता बेनर्जी ने चुनावी अनियमितताओं के विरोध मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने का फैसला किया था। चुनावों के बाद की परंपराओं को तोड़ते हुए ममता बेनर्जी ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा नहीं सौंपा। नतीजतन राज्यपाल ने अपने संवैधानिक अधिकारों को इस्तेमाल करते हुए विधानसभा भंग कर दी और ममता मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस समेत समुचा विपक्ष बीजेपी की जीत को 'वोट चोरी' के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आक्रामक रूख अख्तियार किए हुए ​है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लगातार वोट चोरी के अपने आरोपों को दोहरा रहे हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा के बाद उन्होंने बंगाल और असम की जीत को भी वोट चोरी करार दिया है। 

फोटो सोशल मीडिया से साभार

 

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