(आशु सक्सेना): कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत देना मोदी सरकार के लिए अब सिरदर्द बनता नज़र आ रहा है। सीजेपी के बैनरतले हो रहे इस प्रदर्शन को लेकर लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की 'भूख हड़ताल' सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दरअसल मुख्य मंच सीजेपी के अधिकार क्षेत्र में है। जहां सोनम वांगचुक की 18 दिन से भूख हड़ताल चल रही है।
वामपंथी छात्र संगठनों ने भी प्रदर्शन स्थल पर डेरा डाला
वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन स्थल पर कई सामाजिक संगठनों और वामपंथी छात्र संगठनों ने भी टैंट लगाकर डेरा डाल दिया है। इन टेंटों में कई छात्र भूख हड़ताल पर चल रहे हैं। भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच प्रदर्शन स्थल पर पूरे दिन सरकार विरोधी नारों की गूंज सुनाई देती है। प्रदर्शन स्थल पर चारों तरफ सरकार विरोधी नारों के पोस्टर नज़र आते हैं। सुरक्षा घेरे से गुजर कर भारी तादाद में युवा अपना समर्थन व्यक्त करने प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे हैं। सोनम वांगचुक की मांगों को राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बयान जारी कर उनके आंदोलन का समर्थन किया है। साथ ही उन्होंने सेहत के मद्देनज़र अनशन खत्म करने और फिर देश में जन-एकजुटता की महत्वपूर्ण कड़ी बनने का अनुरोध किया है।
वहीं आज आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी लड़ाई को संसद के भीतर और बाहर पूरी ताकत से लड़ेंगे। आम आदमी पार्टी भी शुरू से ही आंदोलन के पक्ष में खड़ी है। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सीजेपी के आंदोलन का समर्थन का एलान किया है। सीजेपी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को संसद मार्च का एलान किया है। सीजेपी लगातार संसद मार्च में शामिल होने की अपील जारी कर रही है।
नेशनल कांफ्रेंस का भी 20 जुलाई को जंतर मंतर पर प्रदर्शन का एलान
वहीं जम्मू कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल कांफ्रेंस ने भी पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को लेकर 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया है। सूबे के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को श्रीनगर में कहा कि वह प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 19 जुलाई को दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
गौरतलब है कि 20 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होना है। जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य की बहाली की मांग नेशनल कांफ्रेंस की समर्थक पार्टी केंद्र में प्रमुख विपक्ष कांग्रेस भी अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के वक्त से ही पूर्ण राज्य की बहाली की मांग कर रही है। लिहाजा 20 जुलाई को संसद के भीतर और जंतर मंतर दोनों जगह कांग्रेस सक्रिय रहेगी। दूसरे शब्दों में इंडिया गठबंधन का जमावड़ा संसद भवन परिसर के अलावा जंतर मंतर पर भी नज़र आएगा।
माहौल... शाहीन बाग की याद दिला रहा है
इस जन सैलाब को मोदी सरकार कैसे रोकेगी और उसकी क्या योजना है। ये तो सरकार ही बेहतर बता सकती है। लेकिन जो माहौल बन रहा है, वह शाहीन बाग की याद दिला रहा है। यह आंदोलन युवाओं के भविष्य को लेकर चलाया जा रहा है। पिछले 18 दिन की गतिविधियों को देखते हुए 20 जुलाई को जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है।
आंदोलन विरोधी मोदी सरकार के लिए जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत देना अब उसके बड़ी दिक्कत बनती जा रही है। किसानों को मोदी सरकार ने दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया था। जबकि शाहीन बाग आंदोलन कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया था। लेकिन इस बार जमावड़ा संसद भवन के नज़दीक लग रहा है। जंतर मंतर से युवाओं का जमावड़ा खत्म करने की अभी तक मोदी सरकर की तरफ से कोई पहल नहीं हुई है। जो आंदोलन शुरू में मोदी सरकार का प्रयोजित कार्यक्रम माना जा रहा था। वह अब मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सोनम वांगचुक की 18 दिनों से चल रही भूख हड़ताल
दरअसल, सोनम वांगचुक की 18 दिनों से चल रही भूख हड़ताल सिर्फ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नही हैं। उनकी महत्वपूर्ण मांग लद्दाख बचाओ है। लिहाजा प्रधान का इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर का मुद्दा भी गरमा गया है। जंतर मंतर के माहौल को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि दिल्ली पुलिस इंडिया गठबंधन को प्रदर्शन करने से रोक सकेगी। रोकने की स्थिति में हिंसा की आशंका है।
सोनम वांगचुक का यह पहला अनशन नहीं है। भारत में भूख हड़ताल का लंबा इतिहास रहा है, जिसकी सबसे बड़ी पहचान महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दिलाई। आजादी के बाद भी कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर अनशन का सहारा लिया।
लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल को लेकर एक बार फिर अंतराष्ट्रीय स्तर की चर्चा में हैं। यह पहला मौका नहीं है जब वांगचुक किसी मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे हों, सोनम वांगचुक पहले सामाजिक कार्यकर्ता भी नहीं हैं जो इस तरह की हड़ताल कर रहे हैं। भारत में ऐसे कई आंदोलन हुए हैं। आज़ादी के पहले से ही भूख हड़ताल को सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का बड़ा लोकतांत्रिक माध्यम माना जाता रहा है।
सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहां उनकी भूख हड़ताल को 19 दिन हो चुके हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में अनशन पर बैठे हैं। पार्टी संस्थापक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्र प्रभावित हुए।
वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका शरीर लगातार कमजोर हो रहा है, मांसपेशियों में दर्द है और उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है। हजारों समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग हैं।
क्या यह वांगुचक की पहली भूख हड़ताल है?
यह पहली बार नहीं है जब वांगचुक ऐसी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इससे पहले भी वह लद्दाख बचाओ आंदोलन के तहत दो बड़े अनशन कर चुके हैं। वांगचुक ने 6 मार्च 2024 से शून्य से नीचे तापमान में 21 दिन का 'क्लाइमेट फास्ट किया था। इसके बाद अक्तूबर 2024 में उन्होंने 16 दिन की एक और भूख हड़ताल की। उनकी प्रमुख मांगें थीं कि लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए और क्षेत्र के पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हालांकि उनकी मांग पूरी नहीं हुई।
लेकिन अब जंतर मंतर पर 20 जुलाई से जम्मू कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य की बहाली का आंदोलन शुरू करने का भी एलान हो चुका है। यानि मोदी सरकार को अब 370 खत्म करने के बाद जम्मू कश्मीर को दो राज्यों में बांटने के बाद दोनों राज्यों से उभरे जनाकांक्षाओं को पूरा करने का पूरा दबाव बनाया जा रहा है। देखना यह है कि इस समस्या से प्रधानमंत्री मोदी कैसे निजात पाते हैं।






