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नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों के आने से दो दिन पहले ही गोवा में सत्ता की दौड़ भाजपा की बड़ी बैठक के साथ हुई, क्योंकि एग्जिट पोल की माने तो गोवा में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने की संभावना जताई गई है।

गोवा से जुड़ी अहम जानकारियां:

गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने इसी क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की और उन्हें गोवा में सत्ता में बनाए रखने की पार्टी की संभावनाओं पर चर्चा की। इस मीटिंग के बाद सावंत भाजपा गोवा प्रभारी देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक करने के लिए मुंबई पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि फडणवीस गठबंधन के लिए महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के साथ बातचीत कर रहे हैं। यही नहीं भाजपा निर्दलीय उम्मीदवारों तक भी अपनी पहुंच रिजल्ट आने से पहले ही बनाए हुए है। हालांकि एमजीपी प्रमोद सावंत का समर्थन करने के लिए इच्छुक नहीं है, जिन्होंने 2019 में मनोहर पर्रिकर की मृत्यु के बाद मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद पार्टी को छोड़ दिया था।

वहीं सूत्रों की मानें तो एमजीपी या अन्य दलों ने मुख्यमंत्री पद की कीमत पर ही समर्थन देने का संकेत दिया है।

2019 में निधन हो चुके करिश्माई पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद समुद्र तटीय राज्य में भाजपा का यह पहला चुनाव है।

वैसे भाजपा ने गोवा में एग्जिट पोल की संभावनाओं को खारिज कर दिया और विश्वास व्यक्त किया कि वे सबसे बड़ी पार्टी होंगे और सरकार बनाएंगे।

सोमवार को आखिरी दौर का मतदान समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल में गोवा में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। एनडीटीवी के एग्जिट पोल के मुताबिक- गोवा में भाजपा और कांग्रेस दोनों के करीब 40 में से 16 सीटें जीतने की संभावना है जो कि बहुमत के लिए जरूरी 21 सीटों से कम है।

एक्जिट पोल की मानें तो ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को तीन सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह गोवा में सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती हैं। तृणमूल ने एमजीपी से गठबंधन कर चुनाव लड़ा है।

बता दें कि इसी तरह की उथल-पुथल गोवा में 2017 के चुनाव के बाद हुई, जब कांग्रेस ने 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जीत दर्ज की थी, लेकिन वह सत्ता अपने हाथ में लेने में विफल रही थी। भाजपा जिसके पास 13 सीटें थीं ने एमजीपी और निर्दलीय विधायकों सहित छोटे दलों के साथ गठजोड़ करके सत्ता अपने हाथ में ले ली थी।

इस बार कांग्रेस ने पी चिदंबरम और कर्नाटक के डीके शिवकुमार को छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ बातचीत करने के लिए गोवा भेजा हुआ है।

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