शिमला: हिमाचल के मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर बादल फटने के कारण हुए भीषण भूस्खलन से दो बसें जमींदोज हो गईं। हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 45 हो चुकी है। मौत का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। एक बस मनाली से कटरा और दूसरी मनाली से चम्बा जा रही थी।विशेष सचिव (आपदा) डीडी शर्मा ने बताया कि बीती रात ये बसें जब कोटरूपी में जलपान के लिये रुकी थीं तभी यह दुर्घटना हुई।उधर, प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत अभियान का जायजा लिया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख रूपये अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। डीपीआरओ( शिमला) ने बताया कि मुख्यमंत्री ने घटना के शिकार लोगों के परिवारों से भी मुलाकात की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। राज्य सरकार घायल यात्रियों के उपचार का खर्च वहन करेगी। भूस्खलन में पूरा मार्ग बह गया और बसें करीब 800 मीटर गहरी खाई में जा गिरीं जिनमें से एक बस मलबे के नीचे पूरी तरह से दब गई हैं और इसका कोई अता पता नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूस्खलन में लोगों के मारे जाने पर शोक व्यक्त किया है।सेना तथा एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
पुलिस, प्रशासन एवं स्थानीय लोगों के साथ उन्होंने बचाव अभियान शुरू कर दिया है। महानिरीक्षक सेन्ट्रल रेंज एवं उपायुक्त तथा पुलिस अधीक्षक घटनास्थल पर मौजूद हैं। पुलिस महानिदेशक सोमेश गोयल ने बताया कि प्राथमिक सूचना के अनुसार मनाली-कटरा वॉल्वो बस में आठ यात्री जबकि अन्य बस में 47 यात्री थे। परिवहन मंत्री जे एस बाली ने कहा है कि मंडी जिले के कोटरोपी में रात को बारिश के बाद हुए भूस्खलन में परिवहन निगम की दो बसें भी चपेट में आ गईं। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में करीब 50 लोगों के बह जाने की आशंका है। इनमें एक बस चंबा-मनाली और दूसरी मनाली-कटड़ा है। उन्होंने कहा कि रात 2 बजे से राहत व बचाव कार्य जारी हैं और मैं खुद लगातार जिला प्रशासन व अन्य संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हूं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी बुलाया गया है। भूस्खलन की चपेट में दो बसों समेत एक जीप और एक मोटरसाइकिल आ गए। एक अधिकारी ने बताया कि पांच लोगों को बचाया जा चुका है। अब तक आठ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। जिनमें ड्राइवर और कंडक्टर के शव शामिल हैं। कुछ देर पहले की खबर तक पांच लोगों की मौत बताई जा रही थी जबकि छह लोग घायल बताए जा रहे थे। माना जा रहा है कि अभी कुछ और लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सेना और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और राहत कार्य जारी है। हिमाचल में यह ऐसी तीसरी घटना है. इससे पहले वर्ष 1988 में शिमला जिले में मटियाना के निकट भूस्खलन की चपेट में आने से 45 यात्री जमींदोज हो गए थे और1994 में कुल्लू जिले के लुग्गर हाटी में एक अन्य हादसे में 42 लोग दफन हो गए थे। राहुल गांधी की ओर से ऑफिस ऑफ आरजी ट्विटर हैंडल के माध्यम से पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जाहिर की गई है। ट्वीट में स्थानीय कांग्रेस और हिमाचल सरकार से सभी संभव मदद के लिए निवेदन किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल हाई वे 21 को फिलहाल आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भूस्खलन में लोगों के मारे जाने पर आज शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि एनडीआरएफ का एक दल राहत एवं बचाव अभियानों में भाग लेने और हर संभावित मदद मुहैया कराने के लिए मंडी जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘मैं हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भूस्खलन संबंधी हादसों में लोगों की मौत होने से दु:खी हूं। मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिजनों के साथ हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।’’ हिमाचल रोडवेज की दो बसों के कल रात मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर भीषण भूस्खलन की चपेट में आने से आठ यात्रियों की मौत हो गयी है और 22 अन्य लोगों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है।