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नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण ज्ञान-आधारित नौकरियों के प्रभावित होने का जोखिम पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत में कम है। कुल कार्यबल में दफ्तर वाली नौकरियों की अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (स्टेम) आधारित रोजगारों का वर्चस्व होने के कारण ऐसा है।

कृष्णन ने कहा कि रोजगार पर एआई के संभावित प्रभावों को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, भारत के संदर्भ में उन्हें उसी तीव्रता से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में दफ्तर वाली नौकरियों का अनुपात पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे दिमाग से किए जाने वाले कार्यों पर आधारित नौकरियों पर एआई से पड़ने वाला जोखिम सीमित रहता है।

कृष्णन ने कहा, “भारत में अन्य नौकरियों की तुलना में दफ्तर वाली नौकरियों की संख्या कम है। इसलिए ज्ञान-आधारित नौकरियों पर एआई का जोखिम उतना गंभीर नहीं है जितना अन्य देशों में है। इसके अलावा, दफ्तर वाले अधिकांश रोजगार स्टेम क्षेत्र में हैं, जो हमारे लिए अवसर भी पैदा करते हैं।”

नई दिल्ली: इस साल दुनिया में कई तरह की अनिश्चितताएं रहीं, लेकिन कीमती धातुओं (सोना और चांदी) ने निवेशकों को शानदार मुनाफा कराया। खास बात यह रही कि चांदी ने सभी को चौंकाते हुए सोने से भी ज्यादा लाभ कराया। इस साल चांदी की कीमतों में 137 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, जबकि सोने की कीमत करीब 68 प्रतिशत बढ़ी। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण लोग सुरक्षित निवेश की ओर बढ़े, जिसमें सोना और चांदी सबसे अच्छे विकल्प बने। इनमें चांदी सबसे आगे रही।

सोने की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण रहे, जैसे- भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई की चिंता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, जिनकी वजह से लोगों ने सोने में ज्यादा निवेश किया। सोने की कीमत बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। लगातार तीन वर्षों - 2022, 2023 और 2024 में केंद्रीय बैंकों ने हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा। इसके अलावा, कई निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ के जरिए भी सोने में पैसा लगाया।

नई दिल्ली: रुपया बुधवार को शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया और कारोबार के अंत में 16 पैसे टूटकर 89.79 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी की निकासी और सोने के आयातकों से डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये की विनिमय दर में गिरावट आई।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.56 पर खुला। कारोबार के दौरान 89.51 प्रति डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 12 पैसे की बढ़त दर्शाता है। कारोबार के अंत में हालांकि रुपया 89.79 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 16 पैसे कम है। रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.63 पर बंद हुआ था।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण हुई। इसे छुट्टियों से पहले विदेशी निवेशकों की निरंतर पूंजी निकासी तथा सर्राफा आयातकों से डॉलर की बढ़ी हुई मांग से समर्थन मिला।

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। तेल और गैस, फार्मा और आईटी सेक्टर के शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। गुरुवार को क्रिसमस की छुट्टी से पहले निवेशक सतर्क नजर आए, जिस वजह से बाजार में कारोबार की रफ्तार भी धीमी रही। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 116.14 अंक या 0.14 प्रतिशत गिरकर 85,408.70 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 35.05 अंक या 0.13 प्रतिशत गिरकर 26,142.10 पर बंद हुआ।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी 26,100 से 26,130 के सपोर्ट लेवल के आसपास बना रहा, जहां कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन बाजार में मजबूत तेजी नहीं आ पाई। जब तक निफ्टी 26,200 के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता, तब तक बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है। बीएसई पर ट्रेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट और मारुति सुजुकी के शेयरों में बढ़त देखने को मिली, जबकि टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल, सन फार्मा और एशियन पेंट्स के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

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