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नई दिल्ली: रुपया बुधवार को शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख पाया और कारोबार के अंत में 16 पैसे टूटकर 89.79 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी की निकासी और सोने के आयातकों से डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये की विनिमय दर में गिरावट आई।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.56 पर खुला। कारोबार के दौरान 89.51 प्रति डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 12 पैसे की बढ़त दर्शाता है। कारोबार के अंत में हालांकि रुपया 89.79 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 16 पैसे कम है। रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.63 पर बंद हुआ था।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण हुई। इसे छुट्टियों से पहले विदेशी निवेशकों की निरंतर पूंजी निकासी तथा सर्राफा आयातकों से डॉलर की बढ़ी हुई मांग से समर्थन मिला।

परमार ने कहा, "केंद्रीय बैंक द्वारा डॉलर/रुपया अदला-बदली और खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की घोषणा के बावजूद, ये उपाय बाजार में उत्साह पैदा करने में विफल रहे क्योंकि इनसे साल के अंत से पहले डॉलर की आपूर्ति और मांग के बीच बढ़ते अंतर को पाटने में कोई खास मदद नहीं मिली।’’

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 97.81 पर रहा।

घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर सेंसेक्स 116.14 अंक टूटकर 85,408.70 प्रति डॉलर पर जबकि निफ्टी 35.05 अंक फिसलकर 26,142.10 अंक पर बंद हुआ।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.52 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,794.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को कहा था कि वह बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ाने के लिए दो लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। साथ ही 10 अरब अमेरिकी डॉलर की डॉलर-रुपये अदला-बदली नीलामी आयोजित करेगा।

ओएमओ (खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री) के तहत ये खरीद और अदला-बदली नीलामी 29 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच आयोजित की जाएगी।

नौ प्रमुख शहरों में अक्टूबर-दिसंबर में घरों बिक्री 16 प्रतिशत घटी
देश के शीर्ष नौ शहरों में घरों की बिक्री मांग में कमी और आवासीय संपत्तियों की नई पेशकश में गिरावट के कारण अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 16 प्रतिशत घटकर 98,019 इकाई रहने का अनुमान है।

रियल एस्टेट से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली कंपनी प्रॉपइक्विटी ने बुधवार को कहा कि यह जुलाई-सितंबर, 2021 के बाद दर्ज की गई तिमाही आधार पर सबसे कम बिक्री है।

भारत के शीर्ष नौ शहरों में घरों की बिक्री वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में घटकर 98,019 इकाइयों पर आ गई जो एक साल पहले की समान अवधि में 1,16,137 इकाइयां थी।

नवी मुंबई और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को छोड़कर शेष सात शहरों में बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। ये आंकड़े प्राथमिक आवासीय बाजारों से संबंधित हैं। अन्य सात शहर बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, नवी मुंबई और पुणे हैं।

प्रॉपइक्विटी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) समीर जसूजा ने कहा, ‘‘ परंपरागत रूप से अक्टूबर-दिसंबर की अवधि में त्योहारों से बिक्री में काफी तेजी आती है और नई परियोजनाएं पेश होती हैं। हालांकि, हालिया गिरावट बाजार में ‘प्रीमियम’ उत्पादों की ओर रुझान को दर्शाती है जिसका प्रमाण मात्रा में कमी के बावजूद मूल्य वृद्धि से मिलता है।’’ एनएसई में सूचीबद्ध कंपनी पी. ई. एनालिटिक्स लिमिटेड के पास प्रॉपइक्विटी का स्वामित्व है।

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