श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश): आईआरएनएसएस-1जी के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत ने अमेरिका के जीपीएस की तर्ज पर क्षेत्रीय दिशासूचक प्रणाली का अपना ऐतिहासिक अभियान आज (गुरूवार) पूरा कर लिया। यह उपग्रह इस तंत्र का सातवां और अंतिम उपग्रह है। आईआरएनएसएस-1जी जब एक माह के समय में संचालन शुरू कर देगा, तब भारतीय क्षेत्रीय दिशासूचक उपग्रह तंत्र क्षेत्रीय एवं समुद्री दिशा संचालन (नेविगेशन), आपदा प्रबंधन, वाहन के मार्ग का पता लगाने, यात्रियों एवं पर्यटकों को दिशाओं का पता लगाने में मदद करने, चालकों के लिए दृश्यात्मक एवं श्रव्यात्मक नेविगेशन की सुविधाएं उपलब्ध करवाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों की प्रशंसा करते हुए और देश के लोगों को बधाई देते हुए कहा, ‘‘इस सफल प्रक्षेपण के साथ, हम हमारी प्रौद्योगिकी के बल पर खुद अपने रास्ते तय करेंगे।’’ मोदी ने कहा, ‘‘दुनिया इसे नाविक के रूप में जानेगी। नई प्रौद्योगिकी हमारे लोगों, हमारे मछुआरों को लाभ पहुंचाएगी।
यह वैज्ञानिकों की ओर से जनता को एक महत्वपूर्ण तोहफा है।’’