नई दिल्ली: पुडुचेरी में चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच केंद्र ने मंगलवार स्पष्ट किया है कि केंद्रशासित प्रदेश के उपराज्यपाल को किसी प्रदेश के राज्यपाल से अधिक शक्ति हासिल है और वह मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के बिना काम कर सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि उपराज्यपाल किसी भी मामले से संबंधित फाइल मंगा सकता है और मुख्यमंत्री से किसी शंका या किसी पैदा होने वाले सवाल पर जानकारी मांग सकता है। यह स्पष्टीकरण पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी और मुख्यमंत्री वी नारायणसामी के बीच दोनों प्राधिकारों को दी गई शक्तियों पर चल रहे टकराव के बीच आया है। बेदी को केंद्र ने नियुक्त किया है जबकि नारायणसामी कांग्रेस नीत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। इस तरह का टकराव दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच भी देखा गया था। इसपर दिल्ली उच्च न्यायालय ने अगस्त 2016 में उपराज्यपाल की सर्वोच्चता को बहाल रखा था। पुडुचेरी प्रशासन को भेजे गए पत्र में गृह मंत्रालय ने कहा कि दैनिक आधार पर विभागों से संबंधित कामों का निपटारा करने की शक्ति सचिवों की सहायता से मंत्री के पास है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि समान रूप से पुडुचेरी सरकार के कामकाज से संबंधित नियम 21(5) है जिसके तहत उपराज्यपाल किसी मामले से संबंधित दस्तावेज मंगा सकता है।
दस्तावेज में फाइल में शामिल सभी दस्तावेज शामिल होंगे। यद्यपि नियम 21(5) में दस्तावेज शब्द का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन यह काफी व्यापक है और इसमें समूची फाइल शामिल है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि उपराज्यपाल किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले विशेषाधिकार से अधिक व्यापक कार्यपालिका शक्तियों का इस्तेमाल करेगा। राय में अंतर और अत्यावश्यक स्थिति में केंद्र सरकार, राष्ट्रपति को मामला भेजने की स्थिति में उपराज्यपाल जो भी उचित समझेगा वो कदम उठा सकता है और जो भी जरूरी समझता है, वो निर्देश दे सकता है।