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अहमदाबाद: देशद्रोह के मामले में जेल में बंद पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने गुजरात हाई कोर्ट में आज (शुक्रवार) जमानत याचिका दायर की। उनके वकील रफीक लोखंडवाला ने कहा कि अगले सप्ताह इस पर सुनवाई हो सकती है। सत्र अदालत ने मंगलवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हार्दिक ने अपने आवेदन में दलील दी है कि देशद्रोह एक औपनिवेशिक कानून है जिसे स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजों ने लागू किया था और जब वह अपने समुदाय के लिए संघर्ष कर रहे थे तो अहमदाबाद पुलिस ने उन पर गलत तरीके से यह कानून लागू कर दिया। सत्र अदालत ने हार्दिक की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि अगर उनको छोड़ा जाता है तो वह अपराध को दोहरा सकते हैं।
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अहमदाबाद: गुजरात के सूरत जिले में स्थित काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र की 220 मेगावाट वाली दो इकाइयों में से एक को भारी जल के रिसाव के बाद शुक्रवार को बंद कर दिया गया और अस्थायी आपात स्थिति घोषित कर दी गई लेकिन किसी भी रेडियो सक्रिय पदार्थ की लीकेज नहीं हुई है और सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। अधिकारियों के अनुसार भारी जल के रिसाव का पता सुबह नौ बजे चला और इस समस्या को कुछ ही समय बाद दुरस्त कर दिया गया और उसके तुरंत बाद अस्थायी आपातकाल को हटा लिया गया। भारी जल का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टर के कोर को ठंडा करने में किया जाता है। सूरत के जिलाधिकारी राजेंद्र कुमार ने कहा कि संयंत्र में विकिरण का कोई लीकेज नहीं हुआ है और हालात नियंत्रण में है। यह घटना उस दिन हुई है जब जापान भीषण सुनामी के कारण हुए फुकुशिमा परमाणु हादसे की पांचवीं बरसी मना रहा है। केएपीएस के निदेशक एल के जैन ने एक वक्तव्य में कहा कि संयंत्र के भीतर और बाहर विकिरण का स्तर सामान्य है।
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अहमदाबाद: राजद्रोह के कथित मामले में पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की जमानत याचिका को नगर सत्र अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि वह अपराध को दोहरा सकते हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एनजी दवे ने जनवरी में दायर की गई हार्दिक की याचिका खारिज कर दी। अहमदाबाद पुलिस के उनके खिलाफ एक आरोपपत्र दाखिल करने के बाद यह याचिका दायर की गई थी। न्यायाधीश ने अभियोजन की इस दलील को स्वीकार किया कि हार्दिक रिहा होने पर इसी तरह की गतिविधियों में संलिप्त हो सकते हैं। न्यायाधीश ने इस बात का जिक्र किया कि उनके द्वारा हिंसक आंदोलन किए जाने से पिछले साल 40 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। हार्दिक के वकील दिनेश चौधरी ने बताया कि वह हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। अधिवक्ता चौधरी ने दलील दी कि राजद्रोह एक औपनिवेशिक कानून है, जिसे ब्रिटिश शासकों ने स्वतंत्रता सेनानियों की आवाज दबाने के लिए लागू किया था और इसे पटेल नेता के खिलाफ गलत तरीके से लगाया गया है, जो सिर्फ अपने समुदाय के लिए लड़ रहे हैं।
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अहमदाबाद: गुजरात में लिंगानुपात की स्थिति और खराब हुई है। राज्य में 2001 में प्रति 1000 पुरूषों के मुकाबले 920 महिलाएं थीं जबकि 2011 में यह संख्या कम होकर 919 रह गई है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर लिंगानुपात औसत में इस अवधि के दौरान 10 अंकों का सुधार हुआ है। राज्य विधानसभा में 2015-16 के लिए हाल में पेश की गई सामाजिक-आर्थिक समीक्षा में यह बात सामने आई है। समीक्षा में कहा गया है कि 943 के राष्ट्रीय आंकड़े की तुलना में गुजरात में 2011 में लिंगापुनात 919 था। 2011 की जनगणना के अनुसार इस लिंगानुपात के साथ गुजरात 28 राज्यों में 22वें स्थान पर है। हालांकि लिंगानुपात में सुधार के मामले में शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों ने बेहतर प्रदर्शन किया।
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