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बेंगलुरू: टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने आशा जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में निवेश लाने में सफल रहेंगे क्योंकि देश को नई निर्माण कंपनियों की उर्जा चाहिए। उन्होंने यहां ‘मेक इन इंडिया’ नारे से जुड़े एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं से कहा कि मुझे आशा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में कंपनियों को लाने में सफल रहेंगे क्योंकि देश को नई निर्माण कंपनियों की उर्जा की जरूरत है। टाटा ने कहा कि अगर भारत लोगों के लिए व्यापार का माहौल बनाता है तो लोग भारत आएंगे।

नई दिल्ली: भारत और हांगकांग ने वित्तीय सेवा क्षेत्र में आर्थिक सहयोग मजबूत करने का फैसला किया है। भारत की यात्रा पर आए हांगकांग के मुख्य कार्यकारी सीवाई लियुंग ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने लियुंग का उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनकी इस यात्रा से भारत और हांगकांग के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन संपर्क मजबूत हो सकेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में यह जानकारी दी। बैठक के दौरान लियुंग ने प्रधानमंत्री को हांगकांग की कंपनियों की भारत के प्रति रचि के बारे में बताया। मोदी और लियुंग ने विशेषरूप से वित्तीय सेवा क्षेत्र में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग मजबूत करने पर सहमति दी।

नई दिल्ली: पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने गुरुवार को एक विशेष अदालत में कहा कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अपनाई गई प्रक्रियाओं के मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कभी गुमराह नहीं किया। राजा ने सीबीआई के सिंह को गुमराह करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने नवंबर, 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जो बताया था, उन्होंने (राजा ने) वही किया। राजा के वकील मनु शर्मा ने विशेष सीबीआई जज ओ पी सैनी को बताया, ‘मैं अपने पत्रों में तत्कालीन प्रधानमंत्री को गुमराह नहीं कर रहा था। मैंने उनसे कहा था कि 25 सितंबर, 2007 तक आवेदन करने वालों को आवंटित करने के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम मौजूद है। मैंने जो कहा, वह एक साल में पूरा किया। इससे पता चलता है कि मैंने उनसे झूठ नहीं बोला।’ मामले पर अंतिम बहस के दौरान शर्मा ने आरोप लगाया कि वह सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) थी जिसने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं है।

नई दिल्ली: इस्पात और कोयला जैसे गैर विनियमित क्षेत्रों को कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने और समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए उन्हें कोयला लिंकेज यानी कोयला आपूर्ति की सुविधा नीलामी के जरिये आवंटित की जाएगी। नीलामी की प्रक्रिया इसी महीने शुरू हो जाएगी। ये उद्योग कोयला स्रोत आवंटन के मामले में गैर विनियमित क्षेत्र में आते हैं। सरकार का इरादा पहले साल में करीब 2.4 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति सुविधा की नीलामी करने का है। बिजली एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने आज (बुधवार) यहां मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक के इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘सीसीईए ने गैर विनियमित क्षेत्रों को सिर्फ नीलामी के जरिये कोयला लिंकेज देने की अनुमति दी है।’ इन क्षेत्रों में सीमेंट, इस्पात-स्पॉन्ज आयरन, अल्युमीनियम और अन्य (उर्वरक व यूरिया को छोड़कर) क्षेत्र शामिल हैं।

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