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मुंबई: मुंबई की एक अदालत के समक्ष लगातार दूसरे दिन गवाही देते हुए पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा ने यहां ताज होटल में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों पर हमला बोलने की योजना बनाई थी। हेडली ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आईएसआई ने उसे कहा था कि वह उनके लिए जासूसी करने के लिए भारतीय सैन्यकर्मियों को नियुक्त करे। हेडली ने कहा कि भारत में आतंकी हमलों के लिए मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा जिम्मेदार है और यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सभी आदेश इसके शीर्ष कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी की ओर से आए। खुलासे जारी रखते हुए हेडली ने कहा, ‘मैं वर्ष 2006 की शुरूआत में आईएसआई के मेजर इकबाल से लाहौर में मिला था। उन्होंने मुझे भारत की खुफिया सैन्य जानकारी एकत्र करने के लिए कहा था। उन्होंने मुझे जासूसी के लिए भारतीय सेना से भी किसी को नियुक्त करने के लिए कहा था।
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मुंबई: पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने साल 2008 के मुंबई हमले की पूरी साजिश से सोमवार को पर्दा उठाया और अदालत को यह बताया किस तरह पाकिस्तान सरजमीं पर साजिश रची गई और दो नाकाम कोशिशों के बाद 10 आतंकवादियों ने इस शहर में आतंक का खेला। यही नहीं, इस पूरी साजिश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआर्द के तीन अधिकारियों की प्रत्यक्ष भूमिका थी। मुंबई हमले में अपनी भूमिका को लेकर अमेरिका में फिलहाल 35 साल की सजा काट रहे हेडली ने विशेष न्यायाधीश जीए सनप के समक्ष वीडियो लिंक के जरिए करीब साढ़े पांच घंटे की गवाही के दौरान 26 नवंबर, 2008 के मुंबई हमलों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया। मुंबई हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।
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मुंबई: पाकिस्तान के गजल गायक गुलाम अली का कार्यक्रम लखनऊ में होने को लेकर अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने आज उत्तरप्रदेश को ‘इस्लामी राज्य’ के रूप में पेश किया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने तुष्टीकरण की राजनीति के लिए ‘राष्ट्र विरोधी कारोबार’ शुरू कर दिया है। शिवसेना ने अपने सहयोगी भाजपा पर भी चुटकी लेते हुए उसे इन घटनाक्रमों पर ‘मूकदर्शक’ बने रहने का आरोप लगाया । पार्टी ने मांग की है कि जिन लोगों ने कार्यक्रम की अनुमति दी है, उनके खिलाफ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए मुकदमा चलाना चाहिए । शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया है कि, ‘‘ इस्लामी यादव सरकार ने कहा है कि गुलाम अली को हिन्दू.मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम करने को आमंत्रित किया गया है। लेकिन एकता को प्रोत्साहित करने के लिए किसी को केवल पाकिस्तानी कलाकारों की क्या जरूरत है ? हमारे देश में भी बेहतरीन मुस्लिम कलाकार हैं जो काफी प्रसिद्ध भी हैं।’
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मुंबई: उर्दू के मशहूर शायर और फिल्म गीतकार निदा फाजली का 8 फरवरी सोमवार को मुंबई में निधन हो गया है। 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में जन्मे निदा फाजली को शायरी विरासत में मिली थी। उनके घर में उर्दू और फारसी के दीवान, संग्रह भरे पड़े थे। उनके पिता भी शेरो-शायरी में दिलचस्पी लिया करते थे और उनका अपना काव्य संग्रह भी था, जिसे निदा फाजली अक्सर पढ़ा करते थे। निदा फाजली ने सूरदास की एक कविता से प्रभावित होकर शायर बनने का फैसला किया था। यह बात उस समय की है, जब उनका पूरा परिवार बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान चला गया था लेकिन निदा फाजली ने हिन्दुस्तान में ही रहने का फैसला किया। एक दिन वह एक मंदिर के पास से गुजर रहे थे तभी उन्हें सूरदास की एक कविता सुनाई दी जिसमें राधा और कृष्ण की जुदाई का वर्णन था।
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