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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिवृष्टि से प्रदेश में खराब हुई सड़कों को सर्वोच्च प्राथमिकता से ठीक करने के निर्देश दिये हैं। आधिकारिक तौर पर शुक्रवार को यहां बताया गया कि चौहान ने यह निर्देश मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में दिये। इस मौके पर प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जिन सड़कों पर खनिज के परिवहन से ज्यादा यातायात का दबाव है उन पर केवल भारी व्यावसायिक वाहनों से टोल टैक्स लेने की योजना बनाई जाये। बैठक में बताया गया कि सड़कों के पेंचवर्क का कार्य आगामी 31 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जायेगा। लोक निर्माण विभाग द्वारा इस वर्ष 100 पुल-पुलियाओं का निर्माण किया जायेगा। पेंच रिपेयर कार्य की सतत निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री युवा कांट्रेक्टर्स योजना में 810 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। लोक निर्माण विभाग के पीआईयू की ओर से भवन निर्माण के 3720 कार्य पूरे किये गये हैं। विभाग द्वारा चालू वर्ष में 4,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रदेश की सड़कों के रखरखाव की कार्य-योजना बनाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम के क्षेत्र में आने वाली सड़कों की जिम्मेदारी नगर निगमों की रहेगी।
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भोपाल: गुजरात के राज्यपाल ओ पी कोहली ने आज मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन ने आज यहां राजभवन में आयोजित सादे समारोह में कोहली को मध्यप्रदेश के राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। रामनरेश यादव (89) के मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद निवृत्त होने के एक दिन पश्चात कोहली मध्यप्रदेश के 26 वें राज्यपाल बने हैं।
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जबलपुर: ओडिशा के कालाहांडी और बालासोर में एंबुलेंस या मोर्चरी वाहन न मिलने के चलते लाश के साथ अमानवीय व्यवहार की घटना दो दिनों से सुर्ख़ियों में बनी हुई है। उधर मध्य प्रदेश के पनागर तहसील से दबंगों द्वारा जातिगत भेदभाव का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां दबंगों ने कथित तौर पर दलित समुदाय से संबंध रखने वाली शवयात्रा को अपने खेत से नहीं गुजरने दिया। बाद में परिवार को मजबूर होकर तालाब के रास्ते शवयात्रा निकालनी पड़ी। बता दें कि बारिश होने के चलते शमशान घाट तक जाने वाली कच्ची सड़क डूब गयी थी और वहां तक पहुंचने के लिए सिर्फ दबंगों के खेत से गुजर कर जाना पड़ता। ऐसे में ऊंची जाति से ताल्लुक रखने वाले इन दबंगों ने अर्थी को खेत में से ले जाने देने से साफ़ इनकार कर दिया। जिसके बाद मृतक के परिजनों को तालाब के रास्ते शव यात्रा निकालनी पड़ी। बताया जा रहा है कि दबंग जिस खेत को अपनी जमीन बता रहे हैं वो असल में सरकारी जमीन है और उन्होंने इस पर जबरन कब्जा जमाया हुआ है। मामले के बारे में जब जबलपुर कलेक्टर से बात की गई तो उन्होंने इसे आपसी रंजिश का मामला बता दिया। उनके मुताबिक दबंग और मृतक का परिवार एक ही जाति से ताल्लुक रखते हैं। इससे पहले खबर आई थी कि ओडिशा के पिछड़े जिले कालाहांडी में एक आदिवासी को अपनी पत्नी के शव को अपने कंधे पर लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा। उसे अस्पताल से शव को घर तक ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल सका था।
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भोपाल: मध्यप्रदेश में भारी बारिश कहर बनकर आई है। इसने जनजीवन की रफ्तार को थाम दिया है और बारिश पूर्व की जाने वाली तैयारियों की भी कलई खोल दी है। गांवों से लेकर शहर की गलियां तक जलमग्न हो गई हैं। राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और उसने आधे से ज्यादा हिस्से को पूरी तरह तरबतर कर दिया है। मौसम विभाग के आंकडे़ बताते हैं कि राज्य के 51 में से 30 जिले ऐसे हैं, जहां औसत से 20 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं 18 जिलों में सामान्य बारिश हुई है, महज तीन जिले ही ऐसे हैं, जहां औसत से कम बारिश हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सभी बांधों का जलस्तर फुल टैंक लेवल को पार कर गया है और सभी प्रमुख नदियां नर्मदा, बेतवा, केन, टमस, टॉस, चंबल, पार्वती आदि खतरे के निशान के आसपास बह रही है, जिसके चलते नदियों के तट पर बसे गांव और नगरी में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। भारी बारिश ने सबसे ज्यादा तबाही विंध्य के रीवा व सतना और बुंदेलखंड के पन्ना, सागर व छतरपुर में मचाई है, जिससे इन स्थानों पर राहत व बचाव कार्य के लिए सेना और हेलीकॉप्टर की मदद लेनी पड़ रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अफसरों को बाढ़ के हालात से निपटने के लिए पूरी तरह सजग रहने के निर्देश लगातार दे रहे हैं। वे कई बार बैठकें कर चुके हैं, मगर जमीनी स्तर पर ऐसा अब तक तो नजर नहीं आया है कि बाढ़ से निपटने में प्रशासनिक अमले ने खास सक्रियता दिखाई हो। यही कारण है कि एक पखवाडे़ पहले सतना में तबाही मची थी, तो अब एक बार फिर वैसे ही हालात है।
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