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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुक्रवार (12 जून, 2026) तक के लिए टाल दी है।

हालांकि, मीनाक्षी नटराजन की तरफ से पहले तो तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया और फिर उन्होंने कोर्ट से कहा कि परिणाम आज ही घोषित होने हैं, इसलिए कल तक के लिए इस पर रोक लगा दी जाए।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में कल तक इंतजार नहीं किया जा सकता। आज ही परिणाम घोषित होने हैं. एमपी की तीन राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तीन उम्मीदवार खड़े हैं। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद चुनावी मैदान में सिर्फ यही तीन उम्मीदवार हैं और 11 जून को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है, इसलिए कांग्रेस नामांकन खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। नाम वापसी का समय खत्म होते ही, बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया जाएगा।

अभिषेक मनु सिंघवी जब मेंशनिंग कर रहे थे तो कोर्ट ने पूछा कि क्या यह मेंशनिंग नियमों के अनुसार है। इस पर चुनाव आयोग लिए पेश सीनियर एडवोकेट डी एस नायडू ने कहा कि यही हम कह रहे हैं कि यह नियमों के मुताबिक नहीं है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर भी सवाल उठाए। हालांकि, अभिषेक मनु सिंघवी के अनुरोध पर कोर्ट कल मामले को सुनने के लिए तैयार हो गया। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'मैं सिर्फ यही कह रहा हूं कि आप कल सुन लीजिए। तब तक रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दीजिए।' हालांकि, कोर्ट ने रिजल्ट पर रोक लगाने के बारे में कुछ नहीं कहा।

मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर बीजेपी नेताओं ने शिकायत दर्ज की है कि उनका तेलंगाना की हैदराबाद कोर्ट में एक आपराधिक मामला लंबित है, जिसकी जानकारी उन्होंने अपने एफिडेविट में नहीं दी। रिटर्निंग ऑफिसर ने भी इस आपत्ति को स्वीकार किया और उनका नामांकन खारिज कर दिया। उनका कहना है कि कांग्रेस उम्मीदवार ने फॉर्म 26 में इसका जिक्र नहीं किया है इसलिए उनका नामांकन अधूरा है। उन्होंने कहा कि साल 2025 में हैदराबाद कोर्ट के एक नोटिस पर मीनाक्षी नटराजन ने अपना जवाब दाखिल किया था।

कांग्रेस ने नामांकन खारिज किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि कानूनी रूप से इसे गलत ठहराया जा सकता है। उसका कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी आपराधिक निजी मामले में किसी कोर्ट ने संज्ञान लिया है और पहले भेजे गए नोटिस को लंबित मामला नहीं माना जा सकता, जिसका जिक्र उन्हें नामांकन में करना जरूरी था।

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