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नई दिल्ली (जनादेश ब्यूरो): अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने यूपी सरकार ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच के लिए एसआईटी का दोबारा गठन किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के दिए गए निर्देशों को अपनाते हुए नई गठित एसआईटी में वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस को जांच विभाग का प्रमुख बनाया गया है। साथ ही तीन सदस्यीय एसआईटी में दो सीनियर आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें अयोध्या रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर शामिल हैं।

नई एसआईटी में सीए को भी शामिल करें: सुप्रीम कोर्ट 

इस नई गठित एसआईटी पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि टीम में किसी चार्टेड अकाउंटेंट (सीए) को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जल्द ही सीए को भी शामिल किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह एसआईटी में पांचवें सदस्य के तौर पर एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करे। यह टीम दो हफ्ते के अंदर अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद 25 जुलाई को जारी एक नोटिफिकेशन के ज़रिए एसआईटी का गठन किया गया था।

बेंच ने क्या कहा?

बेंच ने सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टालते हुए कहा, 'पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हम घटना की अच्छी तरह से जांच कर रहे हैं।'

सीजेआई ने कहा, 'हम निष्पक्ष, तेज और बिना किसी भेदभाव के जांच कराने पर ध्यान दे रहे हैं।' 20 जुलाई को बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह दान के कथित गबन की जांच के लिए एसआईटी बनाने की संभावना के बारे में जानकारी दे।

 

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