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अहमदाबाद: गुजरात के आणंद जिले में पुल टूटने की वजह से कई वाहन नदी में जा गिरे, इस हादसे में दो बच्चों समेत 13 लोगों की मौत हो गई। जो ब्रिज टूटा है वो महिसागर नदी पर बना है। पुल के टूटते ही ट्रक समेत अन्य वाहन नदी में गिर गए। बताया जा रहा है कि लंबे समय से पुल जर्जर हालत था। इस हादसे को प्रशासन की गंभीर की लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है। महिसागर नदी पर बना यह ब्रिज टूटने से प्रशासन में हड़कंप मच गया।

इस हादसे के बारे में आनंद कलेक्टर प्रवीण चौधरी का कहना है, "...अभी की शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक ट्रक, एक इको और कुछ बाइक नीचे गिरी फिलहाल बचाव कार्य जारी है। वडोदरा प्रशासन और एनडीआरएफ घटनास्थल पर मौजूद हैं...पुल पर फंसे एक टैंकर को गिरने से बचाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। वडोदरा टीम, पुलिस प्रशासन और एनडीआरएफ सभी बचाव कार्य में लगे हुए हैं।"

अधिकारियों ने बताया कि गुजरात के वडोदरा और आणंद ज़िलों को जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना गंभीरा पुल सुबह पादरा में ढह गया। दुर्घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों में वडोदरा ज़िले के पादरा में पुल का एक हिस्सा पूरी तरह से ढहा हुआ दिखाई दे रहा है। फिलहाल इस मामले में अभी और अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

मोरबी पुल हादसे की यादें हुई ताजा

सोशल मीडिया पर जो वीडियो सामने आया है, उसमें कुछ लोग नदी में गिरे वाहनों को रेस्क्यू करते नजर आ रहे हैं। वहीं टूटे पुल पर एक ट्रैंकर नदी में समाने से बाल-बाल बच गया। ट्रैंकर ट्रक का पिछला हिस्सा पुल पर टिका है जबकि आगे का हिस्सा टूटे हुए पुल पर। इस खौफनाक नजारे को देख कई लोगों की सांसे अटक गई। गुजरात में पुल टूटने की एक और खबर से मोरबी पुल हादसे की यादें ताजा हो गई। जब 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

कांग्रेस ने गुजरात सरकार को घेरा

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गुजरात के वडोदरा में महिसागर नदी पर बना गंभीरा ब्रिज बीच से टूट गया। इस हादसे में कई वाहन नदी में गिर गए, जिसके चलते कुछ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई व कई लोग घायल हैं। कांग्रेस परिवार पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना है कि वे घायलों को शीध्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। ये हादसा 'गुजरात मॉडल' के नाम पर हुए जमकर भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है।

बता दें कि यह पुल 1981 में बनकर 1985 में खोला गया था, लेकिन समय के साथ इसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी थी। स्थानीय विधायक चैतन्य सिंह झाला ने पहले ही इस पुल के लिए चेतावनी दी थी और नए पुल की मांग की थी। बावजूद इसके, पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद नहीं की गई। अब सरकार ने 212 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी है और इसके लिए सर्वेक्षण भी कराया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों की टीम को दिए जांच का आदेश

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को घटनास्थल पर भेजकर जांच का आदेश दिया है। हादसे के तुरंत बाद अधिकारी सक्रिय हुए और नदी में गिरे वाहनों को हटाने का कार्य शुरू किया गया। साथ ही तैराकों ने शवों को बाहर निकालना शुरू किया।

यह घटना एक बार फिर पुरानी व कमजोर अधोसंरचनाओं पर सवाल खड़े करती है। अगर समय रहते वाहनों की आवाजाही रोकी जाती और नए पुल का निर्माण शुरू होता, तो शायद यह त्रासदी टाली जा सकती थी। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

 

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