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भोपाल (जनादेश ब्यूरो): मध्य प्रदेश में आखिरकार लाल सलाम ने आखिरी सलाम कह दिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बालाघाट जिले में दो माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद राज्य को नक्सलवाद-मुक्त घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के संकल्प के कारण संभव हो पाया है।

नक्सली दीपक और रोहित ने कल बालाघाट जिले में आत्मसमर्पण किया। दीपक पर 29 लाख रुपये और रोहित पर 14 लाख रुपये का इनाम था। बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने कहा कि जिले में अब कोई भी नक्सली सक्रिय नहीं है।

बालाघाट जिले में गुरुवार (11 दिसंबर) की रात दो कुख्यात नक्सली दीपक और रोहित ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों पर कुल 43 लाख रुपये का इनाम था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस सरेंडर को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि अब मध्यप्रदेश नक्सल आतंक से मुक्त हो रहा है।

नक्सलियों पर भारी इनाम, लगातार दबाव के बाद सरेंडर

पालागोंदी के रहने वाले नक्सली दीपक पर 29 लाख और रोहित पर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों लंबे समय से नक्सल संगठनों के लिए सक्रिय थे और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। सीआरपीएफ और जिला पुलिस की लगातार दबावपूर्ण कार्रवाई के चलते दोनों ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने का निर्णय लिया।

सीआरपीएफ कैंप में पहुंचकर हथियार डाले

कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में पहुंचे दीपक और रोहित ने औपचारिक रूप से हथियार सौंपते हुए हिंसा छोड़ने की इच्छा जताई। अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। आईजी बालाघाट संजय कुमार सिंह ने इसे सुरक्षा एजेंसियों की रणनीतिक सफलता बताया और कहा कि यह अभियान भविष्य के लिए बड़ा संदेश है।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई, विकास और शांति का नया रोडमैप

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीसी के माध्यम से अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि बालाघाट अब नक्सल गतिविधियों से मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने वर्षों तक इस क्षेत्र के विकास को बाधित किया था, लेकिन अब सरकार तेज विकास कार्य कर यहां स्थायी शांति और प्रगति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद फिर कभी सिर नहीं उठा सकेगा।

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